सिद्धालय की ओर बढ़ने के मार्ग में क्षमा का विशेष महत्व है

क्षमापना करते प्रवर्तकश्री, बोले—क्षमा आत्मा को हल्का करने और कर्मों की निर्जरा का पर्व

श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में मना क्षमापना पर्व, तपस्वियों का हुआ सामूहिक पारणा
रतलाम, 16 सितंबर (सम्यक दृष्टि न्यूज़, प्रकाश मुन्नत) क्षमा मनुष्य के जीवन का ऐसा आध्यात्मिक संस्कार है, जो भीतर संचित क्रोध, वैर और कषायों को शांत कर आत्मा को निर्मल बनाने की दिशा में ले जाता है। क्षमा मांगना और क्षमा देना दोनों ही आत्मकल्याण के महत्वपूर्ण साधन हैं। सिद्धालय की ओर बढ़ने के मार्ग में क्षमा का विशेष महत्व है। क्षमापना केवल किसी से औपचारिक रूप से माफी मांगने का अवसर नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन में झांककर आत्मनिरीक्षण करने और जीवन को अधिक शुद्ध बनाने का पर्व है। यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. निर्भय ने कही।

मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में बुधवार को श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की निश्रा में सामूहिक क्षमापना पर्व का भव्य आयोजन हुआ। धार्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। इस अवसर पर प्रवर्तकश्री ने स्वयं सभी से सामूहिक क्षमापना करते हुए क्षमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रवर्तकश्री ने कहा कि क्षमा को ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार कहा गया है। सिद्धालय में पहुंचने का मार्ग क्षमा मांगने और क्षमा देने से होकर गुजरता है। क्षमा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन अपनी भूल को स्वीकार कर विनम्रता के साथ क्षमा मांगना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। जब व्यक्ति अपने अहंकार को छोड़कर अपनी भूल स्वीकार करता है, तभी वास्तविक आत्मशुद्धि की शुरुआत होती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषाय आत्मा को कर्मबंधन की ओर ले जाते हैं। लंबे समय तक मन में द्वेष और वैर बनाए रखना आत्मकल्याण में बाधक बनता है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष तक क्षमा नहीं मांगने की स्थिति अनंतानुबंधी कषाय का कारण बन सकती है। इसलिए जीवन में क्षमा के भाव को निरंतर जागृत रखना आवश्यक है। सभी इन कषायों से बचें और क्षमा के माध्यम से जीवन में ऐसा अवसर आए कि सारे कषाय समाप्त हों तथा आत्मा सिद्धालय में निवास प्राप्त करे।

प्रवर्तकश्री ने कहा कि क्षमापना पर्व हमें केवल दूसरों से क्षमा मांगने की शिक्षा नहीं देता, बल्कि अपने भीतर झांकने की प्रेरणा भी देता है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि उसके मन, वचन या कर्म से जाने-अनजाने किसी जीव को दुःख तो नहीं पहुंचा। यदि किसी को पीड़ा पहुंची हो तो बिना किसी संकोच और अहंकार के क्षमा मांगना चाहिए। यही क्षमापना की वास्तविक भावना है।

उन्होंने भगवान महावीर के संदेश का स्मरण कराते हुए कहा कि क्रोध का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि क्षमा से दिया जाना चाहिए। वैर को वैर से समाप्त नहीं किया जा सकता। वैर की अग्नि को केवल प्रेम और क्षमा ही शांत कर सकते हैं। क्षमा व्यक्ति के भीतर शांति, विनम्रता और आत्मीयता का भाव पैदा करती है। क्षमा करने वाला भी हल्का होता है और क्षमा मांगने वाला भी अपने अंतर्मन के बोझ से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ता है।

श्री संघ पदाधिकारियों ने भी की क्षमापना

क्षमापना सभा को श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत, श्री सौभाग्य तीर्थ के अध्यक्ष कन्हैयालाल गांधी, पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र गादिया, चातुर्मास समिति के महामंत्री संदीप चौरड़िया एवं मंत्री रखब चत्तर ने भी संबोधित किया। उन्होंने वर्षभर में हुए जाने-अनजाने अनुनय-विनय एवं मन-वचन-कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमापना करते हुए कहा कि क्षमा केवल पर्व विशेष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे जीवन का स्थायी संस्कार बने। आत्मशुद्धि, सद्भाव और परस्पर प्रेम के साथ समाज आगे बढ़े, यही क्षमापना पर्व का उद्देश्य है।

तपस्वियों का हुआ सामूहिक पारणा

सामूहिक क्षमापना के बाद तप आराधकों के लिए सामूहिक पारणा का आयोजन किया गया। अठ्ठाई की तप आराधना पूर्ण करने वाले तपस्वियों ने विधिपूर्वक पारणा किया। इसके साथ ही विभिन्न तप आराधनाएं करने वाले अन्य तपस्वियों ने भी पारणा किया। तपस्वियों की आराधना के प्रति उपस्थित समाजजनों ने अनुमोदना व्यक्त की और उनके तप की सराहना की।

कार्यक्रम में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी म.सा., महासती श्री कल्पनाजी म.सा. एवं सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी म.सा. ने भी सामूहिक क्षमापना की।

इस अवसर पर श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। सामूहिक क्षमापना एवं तपस्वियों के पारणा के पश्चात श्री संघ की नवकारसी का आयोजन हुआ। नवकारसी के साथ धार्मिक एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत क्षमापना पर्व के कार्यक्रम का समापन हुआ।

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