जैसे मोबाइल देखते हैं, वैसे परमात्मा को एकाग्रता से देखें : प्रवर्तक पूज्य प्रकाशमुनिजी म.सा.
रतलाम, 14 सितंबर (सम्यक दृष्टि न्यूज़, प्रकाश मुन्नत) पर्वाधिराज पर्यूषण के सातवें दिन मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा का आयोजन हुआ। श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. निर्भय ने श्रद्धालुओं को परमात्मा की भक्ति, त्याग, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग बताते हुए कहा कि परमात्मा की भक्ति करनी हो तो मन, वचन और काया से पूरी तरह प्रभु के पास बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य जिस एकाग्रता से मोबाइल की स्क्रीन देखता है, उसी एकाग्रता से परमात्मा के स्वरूप को देखने और उनकी वाणी को सुनने का प्रयास करना चाहिए।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि प्रभु के सामने दोनों हाथ जोड़कर नमन करने के बाद एकाग्रचित्त होकर उनकी वाणी का श्रवण किया जाए तो वह निश्चित रूप से फलदायी बनती है। परमात्मा की सेवा और आराधना का फल अवश्य मिलता है। उनकी वाणी सुनने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और ज्ञान से व्यक्ति त्याग की ओर अग्रसर होता है। त्याग से जीवन में मर्यादा आती है और मर्यादा के कारण पाप के मार्ग धीरे-धीरे बंद होने लगते हैं। कर्मों की निर्जरा होने पर जीव अशुभ प्रवृत्तियों से रुककर आत्मकल्याण की दिशा में स्थिर होता है और यही सिद्धि प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि वीतराग परमात्मा की वाणी को दुष्ट प्रवृत्ति वाला अभवी जीव ग्रहण नहीं कर सकता। मूढ़ व्यक्ति यदि वाणी सुन भी लेता है और उसका अर्थ समझ भी लेता है, तो उसे जीवन में स्वीकार नहीं करता। संसार के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए परमात्मा द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना आवश्यक है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि यदि संसार के सत्य स्वरूप को समझना है तो निर्मोही बनना होगा। जब आसक्ति और ममता कम होती है, तभी आत्मकल्याण का मार्ग खुलता है। मोह में फंसा हुआ व्यक्ति आत्मस्वरूप को पहचान नहीं सकता। आत्मतत्व को जानने के लिए मोह, मान और माया से मुक्त होना आवश्यक है।
धर्मसभा के प्रारंभ में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा ने संबोधित किया। महासती श्री विभाजी मसा ने शास्त्र का पाठ किया। इसके बाद प्रवर्तकश्री से विभिन्न तपस्याओं के प्रत्याख्यान लिए गए।
40 से अधिक तपस्वियों का सम्मान
चातुर्मास आयोजन समिति की ओर से धर्मचक्र एवं सिद्धीतप की साधना करने वाले 40 से अधिक तपस्वियों का सम्मान किया गया। तपस्वियों ने कठिन साधना के माध्यम से संयम, त्याग और धर्म आराधना का परिचय दिया। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के प्रति अनुमोदना व्यक्त करते हुए उनके तप की सराहना की।
धर्मसभा में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी म.सा., महासती श्री कल्पनाजी म.सा. एवं सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी म.सा. मंचासीन रहे। संचालन रखब चत्तर ने किया।
इस अवसर पर श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla


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