श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की निश्रा में धर्मसभा, 50 से अधिक तपस्वियों का हुआ बहुमान
महासती चंद्रयशाजी म.सा. ने 41 उपवास पूर्ण कर 45 उपवास के प्रत्याख्यान लिएरतलाम, 15 सितंबर (सम्यक दृष्टि न्यूज़, प्रकाश मुन्नत) मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न एवं श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. निर्भय की पावन निश्रा में मंगलवार को संवत्सरी महापर्व श्रद्धा, भक्ति, तप, त्याग और क्षमाभाव के साथ मनाया गया।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर आत्मचिंतन किया और वर्षभर में हुई जाने-अनजाने भूलों के लिए क्षमायाचना का संकल्प लिया। इस अवसर पर चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा अठ्ठाई सहित विभिन्न कठोर तप करने वाले 50 से अधिक तपस्वियों का बहुमान किया गया। वहीं महासती चंद्रयशाजी म.सा. ने 41 उपवास पूर्ण कर 45 उपवास के प्रत्याख्यान लिए।
संवत्सरी बैर की गांठ खोलने का पर्व
धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ने कहा कि संवत्सरी महापर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में परिवर्तन का अवसर है। यह पर्व मनुष्य के भीतर बंधी बैर की गांठ को खोलने का संदेश देता है। जो व्यक्ति अपने मन से बैर, द्वेष और कटुता को निकालकर मैत्री का भाव धारण कर लेता है, वही इस पर्व की वास्तविक भावना को समझ पाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अनेक बार परिस्थितियों के कारण मन में किसी के प्रति नाराजगी या वैमनस्य उत्पन्न हो जाता है। समय बीतने के साथ यह भाव बैर की गांठ का रूप ले लेता है। संवत्सरी हमें अवसर देती है कि हम आत्मावलोकन करें और अपने भीतर झांककर देखें कि कहीं किसी के प्रति राग-द्वेष तो नहीं है। मन से क्षमा करना और दूसरों को क्षमा कर देना ही आत्मा को हल्का बनाता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि शरीर का सुख और मन का सुख स्थायी नहीं है। वास्तविक सुख तो बैर के विसर्जन में है। जब मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रहता, तब जीवन में मैत्री, करुणा और शांति का सृजन होता है। क्षमा केवल मुख से बोले गए शब्द नहीं, बल्कि हृदय की भावना होनी चाहिए।
मान और क्रोध से बंधती है बैर की गांठ
प्रवर्तकश्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में बैर की गांठ बांधने में मान कषाय और क्रोध की बड़ी भूमिका रहती है। इसके साथ ही माया भी व्यक्ति को भीतर से बांधती है। उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य को सबसे अधिक नुकसान बैर और लोभ से होता है। इसलिए इन कषायों से बचने के लिए निरंतर आत्मचिंतन और पुरुषार्थ आवश्यक है।
उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से आह्वान किया कि क्षमापना पर्व पर केवल औपचारिक रूप से क्षमा न मांगें, बल्कि मन की गहराइयों से सभी के प्रति मैत्री का भाव रखें। यदि किसी से भूल हुई है तो उसे क्षमा करें और स्वयं से भी किसी के प्रति हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। यही संवत्सरी पर्व की वास्तविक साधना है।
तपस्वियों का किया बहुमान
धर्मसभा के दौरान चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा कठोर तप आराधना करने वाले 50 से अधिक तपस्वियों का बहुमान किया गया। प्रवर्तकश्री ने अनेक तपस्वियों को तपस्या के प्रत्याख्यान कराए। समाजजनों ने तपस्वियों के त्याग, संयम और साधना की अनुमोदना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
प्रमुख तपस्वियों में प्रखर अश्विन गंग ने 31 उपवास, क्रिजंल अभिषेक मेहता ने 30 उपवास, शिल्वी राकेश छाजेड़ ने 16 उपवास, राकेश गांधी एवं पूजा हेमंत गंग ने 11 उपवास, विनोद झामर एवं सरला विनोद झामर ने 10 उपवास तथा सुरेश ओरा, अतुल कैलाशचंद्र चौरड़िया, जाली राजेंद्र गादिया, शांताबाई राजमल कुमठ एवं अर्पिता कटारिया ने 9-9 उपवास की तपस्या की। इसके अलावा नरेन्द्र लालचंद गंग, प्रीति नरेंद्र गंग, ऋतु महेंद्र गंग, दर्शना राहुल चौरड़िया, रोहित कमलेश चौरड़िया, प्रियांश संजय चौरड़िया, दिव्या प्रियांश चौरड़िया, अक्षत नीतेश जैन सहित अनेक तपस्वियों ने 8-8 उपवास सहित अन्य तप आराधना की।
धर्मसभा में संतों का मिला सानिध्य
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा., महासती श्री चंदनबालाजी म.सा. एवं महासती श्री स्वर्णाश्रीजी म.सा. के संबोधन से हुआ। पारस वोरा ने अध्यक्षीय भाषण दिया। पूर्व श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने चातुर्मास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए तपस्वियों की जानकारी दी।
इस दौरान प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी म.सा., महासती श्री कल्पनाजी म.सा. एवं सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी म.सा. मंचासीन रहे। श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।
16 सितंबर को होगी सामूहिक क्षमापना
संवत्सरी पर्व के अगले क्रम में 16 सितंबर को मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में सुबह 7:30 बजे से सामूहिक क्षमापना का आयोजन श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की निश्रा में होगा। इसके बाद तप आराधकों के लिए सामूहिक पारणा का कार्यक्रम रखा गया है। साथ ही श्रीसंघ की नवकारसी का आयोजन भी होगा। चातुर्मास आयोजन समिति ने समाजजनों से सामूहिक क्षमापना में सहभागी बनकर संवत्सरी पर्व की आध्यात्मिक भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया है।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla


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