गुरुदेव में कलह मिटाने की अद्भुत कला थी

सौभाग्य तीर्थ में जप-तप के साथ मनी मालव केसरी सौभाग्यमलजी म.सा. की पुण्यतिथि

प्रवर्तक प्रकाशमुनिजी म.सा. ने किया गुरुदेव का गुणानुवाद, बोले—प्रेम और मुस्कान से जीवन बनता है सार्थक

रतलाम, 5 सितंबर (सम्यक दृष्टि न्यूज) मालव केसरी, महाराष्ट्र विभूषण, श्रमण संघ प्रणेता एवं प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव 1008 श्री सौभाग्यमलजी म.सा. की मासिक पुण्यतिथि शनिवार को सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ में जप-तप एवं गुणानुवाद सभा के साथ श्रद्धापूर्वक मनाई गई। गुरुदेव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए रतलाम सहित देश के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में गुरुभक्त सौभाग्य तीर्थ पहुंचे।

कार्यक्रम में गुरुदेव के सुशिष्य, श्रमण संघीय प्रवर्तक धर्मदास गणनायक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. निर्भय, सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, साध्वी रत्ना श्री चंदनबालाजी म.सा., सेवाभावी महासती श्री कल्पनाजी म.सा., महाराष्ट्र चंद्रिका खानदेश रत्ना उपप्रवर्तनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. एवं श्री स्वर्णश्रीजी म.सा. ठाणा-8 की निश्रा प्राप्त हुई। प्रारंभ में श्रद्धालुओं ने जाप किया। इसके बाद आयोजित सभा में गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनकी प्रेरणाओं का स्मरण करते हुए गुणानुवाद किया गया।

जो भी आता गुरुदेव के आभामंडल में दुख-दर्द भूल जाता था 

श्रमण संघीय प्रवर्तक धर्मदास गणनायक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. निर्भय ने गुरुदेव का गुणानुवाद करते हुए कहा कि गुरुदेव के आभामंडल में जो भी आता था, वह अपने सारे दुख-दर्द भूलकर हंसने और मुस्कराने लगता था। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जैसा सांवला वर्ण था, वैसा ही गुरुदेव का रूप था। उनकी बुद्धि निर्मल थी और व्यक्तित्व में ऐसी सहजता थी कि उनके संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति आत्मीयता का अनुभव करता था।

प्रवर्तकश्री ने कहा कि ऐसे संत जहां भी जाते हैं, वहां शांति के बीज बोते जाते हैं। गुरुदेव में कलह मिटाने की अद्भुत कला थी। उन्होंने अनेक परिवारों और संघ में आपसी मतभेद दूर कर एकता का सूत्रपात किया। रतलाम गुरुदेव की धर्मभूमि रही है और श्री सौभाग्य तीर्थ में आकर आज भी नई ऊर्जा एवं प्रेरणा का अनुभव होता है।

प्रेम से रहेंगे तो परमात्मा का रूप बन जाएंगे

प्रवर्तकश्री ने कहा कि तीर्थंकर भगवंतों ने अपनी पावन देशना में प्राणी मात्र से प्रेम करने का संदेश दिया है। इस संदेश को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्कराता वही है, जिसके जीवन में प्रेम होता है और पूजनीय वही बनता है, जिसका हृदय प्रेम से लबालब भरा हो। ऐसा व्यक्ति सदैव परोपकार में लगा रहता है।

उन्होंने कहा कि यदि हम प्रेम से रहेंगे तो परमात्मा का रूप बन जाएंगे। गुरुदेव मालव केसरीजी का आभामंडल भी प्रेम, करुणा और आत्मीयता से परिपूर्ण था, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अच्छे विचारों से मन को रखें प्रसन्न

प्रवर्तकश्री ने गुरुदेव के संदेश को याद करते हुए कहा कि मन को हमेशा प्रसन्न रखना चाहिए। अधिक सोचने वाला व्यक्ति अधिक दुखी होता है। इसलिए यदि विचार करना ही है तो अच्छे विचार करें। उन्होंने कहा कि हम मुस्कराएंगे तो दुनिया भी हमारे साथ मुस्कराएगी, लेकिन यदि हम रोएंगे तो साथ रोने वाला कोई नहीं मिलेगा। जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, सद्भाव और परोपकार को स्थान देकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

गुणानुवाद सभा को उपप्रवर्तनी, महासती एवं प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने भी संबोधित किया। जाप का लाभ पारसमलजी, हर्षेन्दु एवं राजेश भरगट वकील साहब परिवार ने लिया। प्रभावना वीरेन्द्र कुमार एवं मदनलाल मूणत, इंदौर वालों द्वारा वितरित की गई।

कार्यक्रम के अंत में ‘भाग्य से सौभाग्य की ओर’ के अंतर्गत चातुर्मास समिति 2026 द्वारा साधार्मिक भक्ति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन रखब चत्तर एवं आयुष गंग ने किया।

कई शहरों से पहुंचे गुरुभक्त

गुरुदेव की पुण्यतिथि में शामिल होने के लिए पुणे, वर्धा, नवी मुंबई, पालघर, सूरत, लिमडी, नासिक, धूलिया, देवास, बदनावर, खाचरौद, थांदला सहित अनेक स्थानों से गुरुभक्त रतलाम पहुंचे। सभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

महासतीजी ने मासक्षमण पूर्ण कर लिए 35 उपवास के प्रत्याख्यान

गुणानुवाद सभा के दौरान तप आराधना का भी विशेष क्रम रहा। प्रवर्तकश्री के सानिध्य में महासती श्री चंद्रयशाजी म.सा. ने मासक्षमण की तपस्या पूर्ण कर 35 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। वहीं महासती श्री अंकिताजी म.सा. की 6 उपवास की तपस्या चल रही है। इसके साथ ही कई अन्य तपस्वियों ने भी अपनी-अपनी तप आराधना के प्रत्याख्यान लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

युवाओं का विशेष शिविर, बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता

रविवार, 6 सितंबर को मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में महासती श्री स्वर्णाश्रीजी म.सा. के पावन सानिध्य में युवाओं के लिए विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर का समय सुबह 8 से 9 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित होगी। आयोजन को लेकर समाजजनों एवं युवाओं में उत्साह है।

Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla 


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