जो आपका है, वह किसी न किसी रूप में आपके पास आएगा
54 उपवास की कठोर एवं दीर्घ तपस्या पूर्ण
संथारा साधिका श्रीमती प्रेमलता बाई ने संथारा के प्रत्याख्यान ग्रहण किए
आसक्ति संसार में अनेक मतभेदों और संघर्षों का कारण बनती है
प्रवर्तकश्री ने कहा कि आचार्यश्री के हम सभी पर बहुत उपकार हैं।
सिद्धालय की ओर बढ़ने के मार्ग में क्षमा का विशेष महत्व है
अंतर के चक्षु ज्ञान से खुलते हैं और ज्ञान से स्थिरता आती है
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