कर्म का उदय आए तो उसे भोगे बिना छुटकारा नहीं : परम् पूज्य श्री गुलाब मुनिजी म.सा. दुःख का स्वीकार ही भावी दुःख का अंत, निमित्त को दोषी मानने से होता है नए कर्मों का बंध नागपुर, 27 सितंबर। धर्मदास संप्रदाय सुमेरु परम पूज्य गुरु…
और पढ़ेंतपस्वी अशोक तलेरा व निलेश बरमेचा ने पूर्ण किए 31-31 उपवास के मासक्षमण जयकार यात्रा के साथ हुआ भव्य बहुमान, मुनि-साध्वी मंडल ने तपस्वियों एवं परिवारजनों ने की अनुमोदना थांदला(सम्यक दृष्टि, मिलिंद कोठारी) धर्मनगरी थांदला में आचा…
और पढ़ेंअपेक्षाओं से तनाव, कर्मों को स्वीकार करने से मिलती है शांति : परम् पूज्य श्री गुलाब मुनिजी म.सा. “जो कुछ भी मिल रहा है, उसे अपने कर्मों का उदय मानकर स्वीकार करें, प्रसन्न रहना सीखें” नागपुर, 28 सितंबर। धर्मदास संप्रदाय सुमेरु प…
और पढ़ेंश्रमण संघीय प्रवर्तक सौभाग्य कुल दिवाकर पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की पावन प्रेरणा से 4 अक्टूबर को तपोमूर्ति चंद्रयशाजी म.सा. की 61 उपवास तपस्या का तप आशीषा महोत्सव रतलाम (सम्यक दृष्टि, प्रकाश मुन्नत) भाग्य …
और पढ़ेंसम्यक् दृष्टि से पढ़ा गया ज्ञान आत्मा के लिए हितकारी : श्रमण संघीय पूज्य प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी म.सा. श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा, प्रवर्तकश्री ने कहा—सम्यक् दृष्टि के अभाव में शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है देश-प्र…
और पढ़ेंदुःख और प्रतिकूलता में दूसरों को दोष देने की बजाय अपने कर्मों को देखें : परम् पूज्य श्री गुलाब मुनिजी म.सा. धर्म की शरण ही शांति और समाधि का मार्ग, अपेक्षा से उपेक्षा और उपेक्षा से बढ़ता है तनाव नागपुर, 25 सितंबर। धर्मदास संप्र…
और पढ़ेंभगवान को भी भोगने पड़ते हैं पुण्य और पाप : प्रवर्तक परम् पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी म.सा. संसार में सुख भोगते हुए भी अनासक्त रहना ही मोक्ष की दिशा में कदम रतलाम, 27 सितंबर (सम्यक दृष्टि, प्रकाश मुन्नत) साता यानी पुण्य का फल तो अप…
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