श्री सौभाग्य तीर्थ में गुरुभक्तों का जनसैलाब उमड़ा
धन जीवन में एक सीमा तक ही काम आता है, लेकिन धर्म हमेशा जीव का सहायक बनता है।
धर्म का मार्ग प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का मार्ग है।
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आत्मकल्याण के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती अपने भीतर छिपे आत्मशत्रुओं पर विजय प्राप्त करना है।
परिग्रह का पत्थर बांधकर संसार सागर पार करना संभव नहीं
दूसरों के दोष देखने के बजाय अपनी भूल स्वीकार करना सीखें, कर्मों के प्रति जागरूकता ही सच्ची साधना है
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