चरित्र ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान है और यही जीवन को सार्थक बनाता है।
महामांगलिक का श्रवण करने देश के विभिन्न शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रतलाम पहुंचे।
राम के जीवन के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता ये थी कि वे विचारों में दृढ़ थे।
संत एवं साध्वी मंडल के सानिध्य में 45 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा नव दिवसीय ओलीजी की तप आराधना
प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल निकले विद्यार्थी
इच्छा दुख का प्रमुख कारण है। इच्छाओं के पीछे भागता हुआ मनुष्य कभी संतुष्ट नहीं हो पाता।
शांति आत्मा का मूल स्वभाव है, लेकिन क्रोध और कषायों के संपर्क में आकर व्यक्ति अपनी शांति खो देता है।
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