तप, त्याग, संयम और धर्म आराधना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को पहचान सकता है
वर्षावास में अब तक 20 मासक्षमण पूर्ण
संतोषपूर्ण जीवन और आत्मचिंतन का महत्व
भाग्य से सौभाग्य की ओर चातुर्मास में तप आराधना का क्रम निरंतर जारी
विश्व शांति, जनकल्याण, आत्मकल्याण तथा पितृ दोष निवारण की भावना के साथ जाप एवं आराधना
‘क्या होगा, कैसे होगा’ की चिंता छोड़ कर्मों के उदय को समभाव से स्वीकार करें
आचार्य भगवन श्री उमेशमुनिजी म.सा. का मासिक स्मृति दिवस मनाया
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