गुरु और धर्म के नाम पर लड़ने के बजाय आत्मा के विकास पर दें ध्यान, मन-वचन और व्यवहार में लाएं बदलाव
जीवन में समभाव बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। समभाव ऐसा आध्यात्मिक उपाय है, जिसके माध्यम से जीव अपने संचित कर्मों की निर्जरा कर सकता है।
फॉर्च्यूनर कार सहित कुल 18 लाख 52 हजार 600 रुपए की सामग्री बरामद
ज्ञानी व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता, जबकि अज्ञानी व्यक्ति तमाम सुख-सुविधाओं के बीच भी दुखी रहता है।
श्री सौभाग्य तीर्थ में गुरुभक्तों का जनसैलाब उमड़ा
धन जीवन में एक सीमा तक ही काम आता है, लेकिन धर्म हमेशा जीव का सहायक बनता है।
धर्म का मार्ग प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का मार्ग है।
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