पूज्या महासती श्री चंद्रयशाजी म.सा. को 61 दिवसीय तपपूर्ति पर “तपमेरू” पद से अलंकरण
दूरबीन नहीं, दर्पण बनिए
धागे को उलझने से बचाने के लिए उसे लपेटकर रखा जाता है और जुबान को उलझनों से बचाने के लिए उसे संयमित रखना चाहिए
प्रत्येक साधक को निरंतर आत्मनिरीक्षण करते हुए अपने भीतर के विकारों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए
स्वच्छता कर्मियों का सम्मान, जनप्रतिनिधियों ने दिया स्वच्छता का संदेश
तप आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा का श्रेष्ठ माध्यम है
यदि संकल्प दृढ़ हो और कार्य उत्साह के साथ किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है
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