दूसरों के दोष देखने के बजाय अपनी भूल स्वीकार करना सीखें, कर्मों के प्रति जागरूकता ही सच्ची साधना है
ज्ञान प्राप्त करने के लिए विनय आवश्यक है, जबकि आत्मकल्याण के लिए कषायों का क्षय और स्वयं के दोषों का दमन करना जरूरी है।
जीवन में किसी भी व्यक्ति या वस्तु के प्रति अत्यधिक मोह नहीं रखना चाहिए।
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सभी तपस्वियों का सम्मान किया गया
मनुष्य को बच्चों की चिंता करने के साथ-साथ अपने जीवन और आत्मकल्याण की चिंता भी करनी चाहिए।
विद्यार्थियों की समस्याओं का तत्काल निराकरण करने पर दिया जोर
प्रवर्तकश्री ने कहा कि कषायों की मंदता उनके जीवन की विशेषता है।
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