संगति भी व्यसनों को बढ़ाने का कार्य करती है

अभ्यस्त होने से जीव व्यसनों का गुलाम बन जाता है : तत्त्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म. सा.

थांदला (सम्यक दृष्टि न्यूज़) 

स्थानीय पौषध भवन पर आयोजित नियमित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए तत्त्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म. सा. ने कहा कि जैन बनने की शुरुआत व्यसनों के त्याग से होती है। व्यसन लगने के मुख्यतः तीन कारण हो सकते हैं—उत्सुकता, संगति दोष और गौरव प्रदर्शन

मुनिश्री ने कहा कि व्यसन अर्थात ऐसी आदत जिसके बिना व्यक्ति रह नहीं पाता और शरीर में आकुलता होने लगती है। किसी भी चीज के प्रति उत्सुकता होना गलत नहीं है, लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि उत्सुकता गलत चीजों के प्रति तो नहीं है। उन्होंने मोबाइल की लत का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों को भोजन कराने के लिए मोबाइल देने की आदत धीरे-धीरे व्यसन का रूप ले सकती है। जैसा हम मोबाइल पर देखते हैं, वैसी ही हमारी मानसिकता बनने लगती है। इसलिए गलत कार्यों के प्रति उत्सुकता नहीं रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि संगति भी व्यसनों को बढ़ाने का कार्य करती है। जैन दर्शन में रात्रि भोजन का त्याग बताया गया है, लेकिन आधुनिक समय में जीव पाश्चात्य संस्कृति की नकल करने लगा है। वहीं गलत कार्यों को करने के बाद उसका गौरव एवं प्रदर्शन करने की प्रवृत्ति भी धीरे-धीरे व्यक्ति को व्यसनों का गुलाम बना देती है।

प्रत्याख्यान से आश्रव रुकता है और इच्छाओं का निरोध होता है : रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म. सा.

रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म. सा. ने प्रत्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्याख्यान करने से जीव के आश्रव द्वार का निरोध होता है। आश्रव द्वार के निरोध से इच्छाओं का निरोध होता है और इच्छाओं के निरोध से जीव सभी द्रव्यों में तृष्णा से रहित होकर शांति से विचरण करता है।

प्रत्याख्यान के पालन में शारीरिक स्थिति, पारिवारिक वातावरण और मन की स्थिति जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। शरीर अनुकूल न हो, घर का वातावरण अनुकूल न हो या मन तैयार न हो, तब भी जिसे त्याग-प्रत्याख्यान का पालन करना है, वह परिस्थितियों के बीच भी उसे दृढ़ता से निभाता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्याख्यान से जीव संयम में रहता है और मन शांत होता है। नियम-प्रत्याख्यान करने से पहाड़ जितना पाप भी राई के दाने जितना रह जाता है। प्रत्याख्यान मन को आश्रव से संवर की ओर लाने का प्रयास है। अतः नियम-प्रत्याख्यान का दृढ़ता से पालन करना चाहिए।

Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla 



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

". "div"