कम उम्र में मासक्षमण जैसी उग्र तपस्या पूर्ण करना अनुमोदनीय

थांदला में 16 वर्ष की उम्र में श्रेयांश लोढ़ा ने पूर्ण किया मासक्षमण, 30 उपवास की कठोर तपस्या

बहुमान से पूर्व नयापुरा से निकली भव्य शोभायात्रा, मार्ग में जगह-जगह हुआ तपस्वी का अभिनंदन; संतों ने कहा—विरली आत्मा ही इतनी कम उम्र में कर पाती है कठिन तप

थांदला (सम्यक दृष्टि न्यूज़, मिलिंद कोठारी) जैन समाज में तप और त्याग की आराधना का क्रम वर्षावास के दौरान निरंतर जारी है। इसी क्रम में लोढ़ा परिवार के 16 वर्षीय श्रेयांश रवि लोढ़ा ने 30 उपवास की कठोर तपस्या मासक्षमण पूर्ण कर समाज को गौरवान्वित किया। इतनी कम उम्र में मासक्षमण जैसी उग्र तपस्या पूर्ण करना अनुमोदनीय होने के साथ ही अन्य धर्मावलंबियों के लिए प्रेरणादायी भी है। उल्लेखनीय है कि श्रीसंघ में 26 अगस्त तक छह मासक्षमण तप पूर्ण हो चुके हैं।

आचार्य श्री उमेशमुनिजी म. सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनिजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्र मुनिजी, रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी आदि ठाणा-8 तथा साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में तप-आराधना का क्रम चल रहा है। श्रीसंघ के श्रावक-श्राविकाएं अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के अनुसार तप आराधना में सहभागी बनकर कर्म निर्जरा का प्रयास कर रहे हैं।

श्रेयांश श्रीसंघ के वरिष्ठ श्रावक माणकलाल लोढ़ा के पौत्र तथा श्री ललित जैन नवयुवक मंडल के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्षीतप आराधक रवि लोढ़ा के इकलौते पुत्र हैं। परिवार में छोटी उम्र में मासक्षमण जैसी कठिन तपस्या पूर्ण होने पर हर्ष का वातावरण रहा।

शोभायात्रा में गूंजे जयकारे

मासक्षमण तप की पूर्णता के अवसर पर नयापुरा स्थित लोढ़ा परिवार के आवास से तपस्वी श्रेयांश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी, आचार्य श्री उमेशमुनिजी, प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनिजी, तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्र मुनिजी तथा तपस्वी श्रेयांश के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा का विभिन्न स्थानों पर परिवारों एवं संस्थाओं द्वारा स्वागत कर तपस्वी का बहुमान किया गया। यात्रा को देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। कम उम्र में इतनी कठिन तपस्या पूर्ण करने वाले श्रेयांश को देखने और उनकी तपस्या की अनुमोदना करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। शोभायात्रा पौषध भवन पहुंचकर बहुमान समारोह में परिवर्तित हुई।

विरली आत्मा ही कम उम्र में कर पाती है इतना कठिन तप

पौषध भवन में आयोजित बहुमान समारोह में तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी एवं संदीपमुनिजी ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रेयांश की तपस्या की अनुमोदना की। संतों ने कहा कि 16 वर्ष की उम्र में मासक्षमण जैसी कठोर तपस्या पूर्ण करना साधारण बात नहीं है। विरली आत्मा ही इतनी कम उम्र में इतना कठिन तप कर पाती है। उन्होंने तपस्वी को खूब-खूब धन्यवाद एवं साधुवाद देते हुए परिवारजनों को भी तपस्या में सहयोग और वातावरण उपलब्ध कराने के लिए साधुवाद दिया।

श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने भी तपस्वी की अनुमोदना करते हुए विचार व्यक्त किए। मासक्षमण तपस्वी परिवार की ओर से तपस्वी की बुआ चेतना सोनी, बदनावर ने अनुमोदनार्थ अपने विचार रखे। तपस्या के प्रसंग पर लोढ़ा परिवार एवं परिवार की बहन-बेटियों द्वारा चौविसी का आयोजन भी किया गया।

तप की बोली लगाकर किया बहुमान

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने बताया की तप की बोली तप से लगवाकर मासक्षमण तपस्वी श्रेयांश लोढ़ा का बहुमान अशोक तलेरा ने 13 उपवास की बोली से किया। संघ की ओर से अभिनंदन पत्र भेंट कर तपस्वी का सम्मान किया गया। इसके अलावा अनेक परिवारों एवं विभिन्न संस्थाओं ने भी तपस्वी का बहुमान कर उनकी तप आराधना की अनुमोदना की।

समारोह के दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से तपस्वी के जयकारे लगाए। कार्यक्रम का संचालन श्रीसंघ सचिव हितेश शाह ने किया। प्रभावना एवं स्वधर्मी वात्सल्य का लाभ लोढ़ा परिवार ने लिया।

वर्षावास के दौरान थांदला में धर्म, तप और आराधना का वातावरण बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह एवं जिज्ञासा के साथ धर्म आराधना में रमण कर रहे हैं। अनेक तपस्वी मासक्षमण तप की ओर अग्रसर हैं। ऐसे में 16 वर्षीय श्रेयांश लोढ़ा द्वारा 30 उपवास पूर्ण करना श्रीसंघ के लिए गौरव एवं तप-आराधना के प्रति नई पीढ़ी की आस्था का प्रेरक उदाहरण बना है।

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