45 दिवसीय सिद्धि तप पूर्ण कर प्रिया व्होरा ने रचा तप आराधना का नया अध्याय

तपस्वी के बहुमान समारोह में संत-साध्वी मंडल ने की अनुमोदना, तप की बोली लगाकर किया अभिनंदन; श्रीसंघ में धर्म और तप आराधना का बढ़ रहा उत्साह

थांदला (सम्यक दृष्टि न्यूज़, मिलिंद कोठारी) संयमी आत्माओं के सानिध्य में तपस्या की अनुमोदना और तपस्वी के बहुमान का विशेष आयोजन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा किया गया। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पूर्व अध्यक्ष महेश व्होरा की पुत्री तथा श्री महावीर जैन पाठशाला की संचालिका प्रिया व्होरा ने 45 दिवसीय सिद्धि तप की कठोर तपस्या पूर्ण कर तप आराधना से थांदला श्रीसंघ का गौरव बढ़ाया। तपस्वी प्रिया व्होरा पूर्व में भी विभिन्न कठिन तपस्याएं कर चुकी हैं।

तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित बहुमान समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म. सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी, जयंतमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी एवं गौरवमुनिजी ठाणा-8 तथा साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी एवं दीप्तिजी ठाणा-4 के सानिध्य में तपस्वी की तप आराधना की अनुमोदना की गई।

तप आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का माध्यम

धर्मसभा में संत-साध्वी मंडल ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन दर्शन में तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और कर्म निर्जरा की साधना है। तप के माध्यम से साधक अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण प्राप्त करते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है। 45 दिवसीय सिद्धि तप जैसी कठिन आराधना तपस्वी के दृढ़ संकल्प, संयम और आत्मबल को दर्शाती है।

संतों ने तपस्वी प्रिया व्होरा की आराधना के लिए खूब-खूब धन्यवाद एवं साधुवाद देते हुए उनकी तपस्या की अनुमोदना की। साथ ही इस कठिन तप में परिवारजनों द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

तप की बोली लगाकर किया बहुमान

तपस्या पूर्ण होने के अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से तप की बोली लगाकर तपस्वी का बहुमान किया गया। संघ की ओर से तपस्वी को अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही नगर के कई परिवारों एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा भी प्रिया व्होरा का बहुमान कर उनकी तप आराधना की अनुमोदना की गई।

बहुमान समारोह के दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से तपस्वी के जयकारे लगाए। वातावरण में भक्ति, उत्साह और तप आराधना की भावना दिखाई दी।

वर्षावास में बढ़ रहा तप-आराधना का उत्साह

श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने भी सभा को संबोधित करते हुए तपस्वी की आराधना की अनुमोदना की। उन्होंने कहा कि वर्षावास के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह और जिज्ञासा के साथ धर्म, स्वाध्याय एवं तप आराधना में रमण कर रहे हैं। संघ में अनेक तपस्वी मासक्षमण जैसी कठिन तपस्या की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

कार्यक्रम का संचालन श्रीसंघ के सचिव हितेश शाह ने किया। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वी प्रिया व्होरा की 45 दिवसीय सिद्धि तप की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।

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