तप की बोली तप से लगाकर किया बहुमान

थांदला गौरव तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. के सानिध्य में युवा तपस्वी प्रतीक पावेचा ने पूर्ण किए 16 उपवास

तप की बोली तप से लगाकर हुआ तपस्वी का बहुमान, संयमी आत्माओं ने की तपस्या की अनुमोदना; धर्म सहायिका दर्शना पावेचा ने भी इसी वर्षावास में 11 उपवास किए थे 

थांदला (सम्यक दृष्टि, मिलिंद कोठारी) जैन धर्म में तपस्या आत्मशुद्धि, कर्म निर्जरा और आत्मकल्याण का महत्वपूर्ण माध्यम मानी गई है। जब किसी परिवार में कोई सदस्य कठोर तपस्या करता है तो पूरा परिवार गौरवान्वित होता है। पावेचा परिवार के लिए भी यह अवसर विशेष खुशी और गौरव का रहा, जब युवा तपस्वी एवं युवा व्यापारी प्रतीक पावेचा ने तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. एवं संत-साध्वी मंडल के सानिध्य में 16 उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण की। तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित बहुमान समारोह में साधु-साध्वी भगवंतों एवं श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने तपस्वी की अनुमोदना करते हुए साधुवाद दिया।

उल्लेखनीय है कि इसी वर्षावास के दौरान तपस्वी प्रतीक पावेचा की धर्म सहायिका तपस्वी दर्शना पावेचा ने भी 11 उपवास की तपस्या कर परिवार एवं श्रीसंघ को गौरवान्वित किया था। एक ही परिवार में लगातार तप आराधना का यह क्रम धर्म और साधना के प्रति परिवार की श्रद्धा को दर्शाता है।

संयमी आत्माओं ने की तप की अनुमोदना

आयोजित बहुमान समारोह में तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. एवं रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म.सा. ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए तपस्वी प्रतीक पावेचा की 16 उपवास की कठिन साधना की मुक्त कंठ से अनुमोदना की। उन्होंने तपस्वी को खूब-खूब धन्यवाद एवं साधुवाद देते हुए कहा कि तपस्या केवल तपस्वी की व्यक्तिगत साधना नहीं होती, बल्कि इससे परिवार, समाज और श्रीसंघ में भी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

साधु-साध्वी मंडल ने तपस्या के दौरान परिवारजनों द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि तपस्वी के साथ परिवार का संयम, सहयोग और उत्साह भी इस साधना यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

तप की बोली तप से लगाकर किया बहुमान

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से तपस्वी प्रतीक पावेचा का विशेष रूप से बहुमान किया गया। तप की बोली तप से लगाकर तपस्या के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। इसके बाद तपस्वी को शाल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर सम्मानित किया गया। विभिन्न परिवारों एवं संस्थाओं की ओर से भी तपस्वी का बहुमान किया गया। इस दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वी के जयकारे लगाकर तपस्या की अनुमोदना की।

वर्षावास में निरंतर जारी है तप आराधना

आचार्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य, धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-8 तथा साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में थांदला में तप आराधना का क्रम निरंतर जारी है।

श्रीसंघ का प्रत्येक सदस्य अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार तप आराधना में सहभागी बनकर कर्मों की निर्जरा कर रहा है। इसी क्रम में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के विशेष आमंत्रित सदस्य भूपेंद्र पावेचा के छोटे पुत्र तथा श्री ललित जैन नवयुवक मंडल के कार्यकारिणी सदस्य प्रतीक पावेचा ने 16 उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण कर परिवार एवं श्रीसंघ का गौरव बढ़ाया।

सभा में श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया सहित अन्य पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए तपस्वी की अनुमोदना की। तपस्या पूर्ण होने के इस अवसर पर पावेचा परिवार को समाजजनों एवं शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए तपस्वी के उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।


Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla 


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