तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. के सानिध्य में तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल ने पूर्ण की 54 उपवास की कठोर तपस्या
थांदला के आध्यात्मिक इतिहास में पहली बार हुई 54 उपवास की दीर्घ तप आराधना, श्रीसंघ ने जयकारों के साथ किया तपस्वी का अभिनंदनतप की अनुमोदना में श्रावक-श्राविकाओं ने लिए 54 नियम प्रत्याख्यान, विभिन्न संस्थाओं व परिवारों ने किया बहुमान
थांदला (सम्यक दृष्टि, मिलिंद कोठारी) धर्मनगरी थांदला में वर्षावास के दौरान तप, त्याग, संयम और आराधना का क्रम निरंतर जारी है। श्रीसंघ का प्रत्येक सदस्य अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के अनुसार तप आराधना में सहभागी बनकर कर्मों की निर्जरा का पुरुषार्थ कर रहा है। इसी क्रम में श्री ललित जैन नवयुवक मंडल के सक्रिय सदस्य लवी श्रीश्रीमाल की धर्मसहायिका तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल ने 54 उपवास की कठोर एवं दीर्घ तपस्या पूर्ण कर थांदला के आध्यात्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। श्रीसंघ के अनुसार इतनी लंबी 54 उपवास की तपस्या थांदला में पहली बार हुई है।
आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य, धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-8 तथा साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में तप-आराधना का क्रम लगातार चल रहा है। इसी आध्यात्मिक वातावरण में आरती श्रीश्रीमाल ने दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ 54 उपवास पूर्ण किए।
पूर्व में भी कर चुकी हैं अनेक कठिन तपस्याएं
तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल की यह तपस्या उनके निरंतर तप-पुरुषार्थ की कड़ी है। इससे पूर्व वे दो मासक्षमण, 11 उपवास एक बार, 9 उपवास नौ बार सहित अनेक तपस्याएं पूर्ण कर चुकी हैं। 54 उपवास की इस कठोर साधना के दौरान उन्होंने संयम, धैर्य और आत्मबल का परिचय देते हुए तप की आराधना को आगे बढ़ाया।
परिवार के साथ पूरे श्रीसंघ में छाया उल्लास
किसी परिवार में तप की आराधना होने पर पूरे परिवार में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बन जाता है। वहीं जब तप लंबा और कठिन हो तो यह खुशी और भी बढ़ जाती है। श्रीश्रीमाल परिवार की बहू आरती श्रीश्रीमाल द्वारा 54 उपवास पूर्ण किए जाने पर परिवार के साथ-साथ पूरे श्रीसंघ में हर्ष और उत्साह का वातावरण रहा। श्रीसंघ के सदस्यों ने तपस्वी के तप की अनुमोदना करते हुए इसे अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी बताया।
जयकार यात्रा में गूंजे तपस्वी के जयकारे
तपस्वी के बहुमान समारोह से पूर्व श्रीसंघ के वरिष्ठ रमेशचंद्र श्रीश्रीमाल के निवास से तपस्वी की जयकार यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। भगवान महावीर स्वामी, आचार्य श्री उमेशमुनिजी म.सा., प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा., तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. तथा तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
जयकार यात्रा के बाद आयोजित धर्मसभा में तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., श्री संदीपमुनिजी म.सा. सहित संत-साध्वी मंडल ने तप की महत्ता पर प्रकाश डाला। संतों ने तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल की कठिन तप आराधना की अनुमोदना करते हुए उन्हें धन्यवाद एवं साधुवाद दिया। साथ ही परिवारजनों द्वारा तप के दौरान दिए गए सहयोग की भी सराहना की।
54 उपवास की अनुमोदना में 54 नियमों का प्रत्याख्यान
तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल की 54 उपवास की तपस्या के उपलक्ष्य में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने तप की अनुमोदना करते हुए आजीवन आदि के 54 नियम प्रत्याख्यान ग्रहण किए। इस प्रकार साधकों ने अपने जीवन में भी संयम एवं नियमों को अपनाकर तपस्वी के तप के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
धर्मसभा में धर्मदास गण परिषद के अध्यक्ष भरत भंसाली, श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल, श्रीसंघ उपाध्यक्ष हेमंत श्रीश्रीमाल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और तपस्वी को साधुवाद दिया। श्रीसंघ एवं संघ की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और सदस्य भी तपस्वी के निवास पर पहुंचे तथा उनके तप की मुक्त कंठ से अनुमोदना की।
‘तप की बोली, तप से’ लगाकर हुआ बहुमान
54 उपवास की तपस्वी आरती श्रीश्रीमाल का ‘तप की बोली, तप से’ लगाकर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से बहुमान किया गया। इस अवसर पर तपस्वी को अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न परिवारों एवं संस्थाओं की ओर से भी तपस्वी का बहुमान किया गया।
धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक तपस्वी के जयकारे लगाए। कार्यक्रम का संचालन श्रीसंघ सचिव हितेश शाहजी ने किया।
वर्षावास में तप-आराधना का बना आध्यात्मिक वातावरण
वर्षावास के दौरान थांदला में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह और जिज्ञासा के साथ धर्म, साधना एवं तप आराधना में रमण कर रहे हैं। श्रीसंघ के अनुसार अब तक 13 मासक्षमण और दो सिद्धि तप सहित अनेक तपस्याएं पूर्ण हो चुकी हैं। कई तपस्वी वर्तमान में मासक्षमण सहित विभिन्न तप आराधनाओं की ओर अग्रसर हैं।
बाल तपस्वियों ने भी किए 11-11 उपवास
तप आराधना में बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रिशा अमित शाहजी और चार्मी श्रेयांश बांठिया ने 11-11 उपवास की तपस्या पूर्ण की। दोनों बाल तपस्वियों का भी श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया। बच्चों की इस तप आराधना ने धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
54 उपवास की तपस्या पूर्ण कर आरती श्रीश्रीमाल ने न केवल अपने आत्मिक पुरुषार्थ को नई ऊंचाई दी, बल्कि थांदला की तप-परंपरा में भी एक उल्लेखनीय अध्याय जोड़ा। उनकी तपस्या की श्रीसंघ द्वारा की गई अनुमोदना ने वर्षावास के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान की।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla


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