संथारा सहित देवलोक गमन: धर्मनिष्ठ सुश्राविका श्रीमती निर्मला देवी बोथरा को दी गई भावभीनी विदाई
धर्मनिष्ठ सुश्राविका श्रीमती निर्मला देवी बोथरा को महासती निखिलशीलाजी म.सा. ने शनिवार शाम उनके निज निवास स्थान पर संथारा व्रत का प्रत्याख्यान विधिपूर्वक करवाया। संथारा ग्रहण करने के लगभग 50 मिनट पश्चात ही उनका संथारा सफल हुआ और उन्होंने शांत भाव से देवलोक गमन किया। इस दौरान परिवारजन एवं समाजजन उपस्थित रहकर धर्ममय वातावरण में नमोकार मंत्र का जाप करते रहे।
श्री संघ जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष स्व. श्री बलवंत राय जी बोथरा की पुत्रवधु एवं श्री प्रकाशचंद्र जी बोथरा की धर्मपत्नी निर्मला देवी बोथरा धार्मिक प्रवृत्ति की धनी थीं। वे जीवनभर जप, तप, संयम और साधना में लीन रहीं तथा समाज में एक आदर्श सुश्राविका के रूप में प्रतिष्ठित थीं। परिवार में वे सुभाष चंद्र की भाभीजी, सचिन एवं नितेश (टीनू) बोथरा की माताजी तथा रिशु, साध्य, मितांश और राघव की दादीजी थीं।
रविवार, 12 अप्रैल को प्रातः 9 बजे उनके निज निवास से डोल यात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई स्वर्ग वाटिका (पद्मावती नदी) पहुंची। यहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न किया गया।
अंतिम यात्रा में सकल जैन समाज, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया सहित उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने संथारा साधिका की आत्मा की सद्गति एवं मोक्ष मार्ग की ओर प्रशस्त होने के लिए प्रार्थना करते हुए मंगल कामनाएं व्यक्त की।
श्रीमती निर्मला देवी बोथरा का जीवन सादगी, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। उनका संथारा सहित देवलोक गमन जैन समाज के लिए त्याग, तप और आत्मसंयम की प्रेरणा के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla


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