समता, संतोष और त्याग की प्रतिमूर्ति थे रुपेंद्रमुनिजी म.सा.: गुणानुवाद सभा में हुआ स्मरण
गुणानुवाद सभा में धर्मेन्द्रमुनिजी ने कहा—रुपेंद्रमुनिजी के जीवन में ईर्ष्या, लोकेषणा और मान कषाय का लेशमात्र भी नहीं था; 125 श्रावक-श्राविकाओं ने किया सामूहिक एकासन तपथांदला (सम्यक दृष्टि, मिलिंद कोठारी) आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. के गुरु भ्राता, श्रमण संघीय सलाहकार, करुणामूर्ति पंडित रत्न पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म.सा. की 28वीं पुण्यतिथि बुधवार को धर्मनगरी थांदला में जप, तप, त्याग, तपस्या एवं विविध धर्माराधनाओं के साथ श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-8 एवं साध्वी निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 सहित 12 संयमी आत्माओं के सानिध्य में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए।
श्री संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं सचिव हितेश शाहजी ने बताया कि पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय पौषध भवन में गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया। सभा में तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. ने पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म.सा. के जीवन का गुणानुवाद करते हुए कहा कि उनके जीवन में ईर्ष्या भाव और लोकेषणा का जरा भी स्थान नहीं था। वे अत्यंत संतोषी संत थे तथा मान कषाय से सदैव दूर रहे। संस्कृत एवं प्राकृत आदि भाषाओं के साथ वे थोकड़ों के भी विशेष जानकार थे और विशिष्ट ज्ञान के निरंतर अभ्यासी रहे।
उन्होंने कहा कि शारीरिक वेदना के बावजूद रुपेंद्रमुनिजी ने लगातार विहार किया। अनेक छोटे-छोटे संघों ने भी उनसे स्थिरवास की विनती की, लेकिन उन्होंने अपनी संयमी जीवनचर्या को प्राथमिकता दी। बड़े होने के बावजूद वे सदैव छोटों को आगे बढ़ाते थे। उनके जीवन में इतने गुण थे कि उनका पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं है। विशिष्ट आराधना करते हुए उन्होंने अपने संयमी जीवन को सफल और सार्थक बनाया।
रोचक वक्ता संदीपमुनिजी म.सा. ने कहा कि पूज्य रुपेंद्रमुनिजी म.सा. सदैव समता भाव में रहते थे। वे स्वयं पीछे रहकर बड़ों को आगे करते थे। यही कारण था कि वे लोगों के हृदय में बसे हुए थे। उनके जीवन में महत्वाकांक्षा का लेशमात्र भी नहीं था।
सभा में रतलाम एवं मेघनगर श्री संघ के साथ बदनावर और मंडलेश्वर से आए श्रावक-श्राविकाएं भी उपस्थित रहे। श्री धर्मदास जैन श्री संघ रतलाम के महामंत्री राजीव चौरड़िया ने संत-साध्वी मंडल से संवत्सरी संबंधी क्षमायाचना करते हुए वर्षावास के पश्चात रतलाम पधारने की पुरजोर विनती की। मेघनगर श्री संघ के उपाध्यक्ष विनोद बाफना ने भी संघ की ओर से संवत्सरी क्षमायाचना की। मेघनगर बहू मंडल ने सामूहिक स्तवन प्रस्तुत किया। संचालन श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने किया।
125 श्रावक-श्राविकाओं ने किया सामूहिक एकासनपुण्यतिथि के प्रसंग पर श्री संघ द्वारा स्थानीय महावीर भवन में सामूहिक एकासन तप का आयोजन किया गया, जिसमें 125 श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन तप की आराधना की। इसके साथ ही श्रावक-श्राविकाओं ने तीन-तीन सामायिक की आराधना भी की। दिनभर धर्मनगरी में तप, त्याग और आराधना का वातावरण बना रहा।
तपस्याओं का दौर जारी
श्री संघ के सहसचिव कपिल पीचा एवं नवयुवक मंडल अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा ने बताया कि इन दिनों बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तप आराधना में लीन हैं। बुधवार को धर्मसभा में श्री संघ के उपाध्यक्ष अशोक तलेरा एवं निलेश बरमेचा ने 28-28 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। डॉक्टर गोल्डी प्रदीप शाहजी, कुमारी भवी जितेंद्र चौरड़िया, अल्केश लोढ़ा, अनमोल लोढ़ा, प्रवीण श्रीमाल, रूपल श्रीमाल एवं श्वेता संदीप शाहजी ने 16-16 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। प्रिया प्रफुल्ल तलेरा ने 7 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
वहीं रत्नपुरी गौरव युवा संत श्री गिरीशमुनिजी म.सा. की सांसारिक बुआ माला सुरेशचंद्र जैन, रतलाम ने 18 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। श्री संघ की ओर से श्री धर्मलता जैन महिला मंडल अध्यक्ष किरण श्रीश्रीमाल ने तपस्वी का शाल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर बहुमान किया। इस अवसर पर श्री गिरीशमुनिजी म.सा. के सांसारिक पिता ललित एवं माताजी प्रमिला गांधी सहित अनेक संयमी आत्माओं के स्वजन एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla



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