पेटलावद में धूमधाम से निकली समरसता कावड़ यात्रा, शिवभक्ति और सनातन संस्कृति के रंग में रंगे श्रद्धालु
पेटलावद (जितेश विश्वकर्मा, सम्यक दृष्टि न्यूज़)
सावन माह पावन अवसर में रमेश सोलंकी मित्र मंडल के तत्वावधान में भव्य समरसता कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया, जो अब अपनी सफलता के आठवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ने पूरे अंचल को आस्था के सागर में डुबो दिया।
पेटलावद क्षेत्र पूरी तरह शिवमय नजर आया। अलसुबह से ही स्थानीय शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और चहुंओर हर-हर महादेव तथा बोल बम के जयकारे गूंजते रहे।
लाडकी नदी तट से उठी कावड़ यात्रा-
यात्रा की शुरुआत ग्राम रामगढ़ स्थित लाडकी नदी के पावन तट से हुई। यहां विधि-विधान से पूजन के पश्चात कावड़िए पवित्र जल लेकर पैदल पेटलावद स्थित ऐतिहासिक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के लिए रवाना हुए। हजारों की संख्या में शामिल शिवभक्तों ने भगवा वस्त्र धारण कर हाथों में कांवड़ उठाई थी। ढोल-ढमाकों की थाप, डीजे की धुन और गूंजते धार्मिक नारों ने पूरे यात्रा मार्ग को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान विभिन्न रूपों में सजे स्वांगधारी कांवड़िए भी यात्रा का विशेष आकर्षण रहे, जिन्हें देखने के लिए सड़क भारी भीड़ एकत्र हुई।
नीलकंठेश्वर मंदिर में जलाभिषेक और महाप्रसादी-
यात्रा के पेटलावद पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में कावड़ के पवित्र जल से भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा, जहां सभी ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस धार्मिक माहौल को और अधिक जीवंत बनाने के लिए प्रसिद्ध गुजराती गायक विक्रम चौहान ने अपनी सुमधुर आवाज में मंत्रमुग्ध कर देने वाले भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिन पर उपस्थित शिवभक्त झूम उठे। यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों द्वारा पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का भव्य स्वागत किया गया तथा जगह-जगह जलपान की सुंदर व्यवस्थाएं की गईं।
धर्म सभा और संतों का मार्गदर्शन-
यात्रा के पश्चात एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया, जिसमें महान संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी मधुसूदनान्द गिरी जी महाराज ( श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा) ने अपने ओजस्वी संबोधन में श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखना प्रत्येक सनातनी का परम कर्तव्य है। उन्होंने समाज में हो रहे धर्मांतरण जैसी कुप्रथाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए इस पर रोक लगाने और समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। महाराजश्री ने बल देते हुए कहा कि हिंदू समाज को आपसी दूरियां मिटाकर सदैव एक-दूसरे का साथ देना चाहिए और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष हेमंत भट्ट ने समरसता कावड़ यात्रा के सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने आयोजकों और क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं समाज को पिरोने और आपसी भाईचारा बढ़ाने का कार्य करती हैं। श्री भट्ट ने कहा कि पेटलावद क्षेत्र की यह यात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का एक बड़ा प्रतीक बन चुकी है, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही है। मंच पर 108 श्री जितेनानंद जी महाराज भी विशेष रूप से मौजूद रहे, जिनके सान्निध्य ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
आयोजक जनपद पंचायत पेटलावद अध्यक्ष रमेश सोलंकी ने इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण अंचल में सामाजिक समरसता और सनातन धर्म के प्रति जनजागृति फैलाना है। मंच संचालन सुखराम मोरी ने किया। आभार संजय कहार ने माना। अंत में महाप्रसादी वितरण के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन हुआ। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग का भी पूरा सहयोग रहा, जिन्होंने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
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