30 उपवास की तप साधना से बढ़ाया थांदला श्रीसंघ का गौरव, रवि गादिया का बहुमान, थांदला गौरव तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी के सानिध्य में तप की साधना
तपस्वी रवि गादिया ने पूर्ण किया 30 उपवास का मासक्षमण, तप की बोली तप से लगाकर हुआ भव्य बहुमानबहुमान से पूर्व निकली जयकार यात्रा, पौषध भवन में धर्मसभा में हुआ रूपांतरण; संतों ने तप की महत्ता बताकर की अनुमोदना
थांदला (मिलिंद कोठारी, सम्यक दृष्टि न्यूज़) आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म. सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म. सा. के सानिध्य में तपस्या की आराधना का क्रम निरंतर जारी है। इसी क्रम में तपस्वी रवि प्रकाशचंद्र गादिया ने 30 उपवास यानी मासक्षमण की कठोर तपस्या पूर्ण कर थांदला श्रीसंघ का गौरव बढ़ाया। तपस्या पूर्ण होने पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से तपस्वी का भव्य बहुमान किया गया। इस अवसर पर तप की बोली तप से लगाई गई, जो समारोह का विशेष आकर्षण रही।
तपस्वी के बहुमान समारोह से पूर्व उनके निवास स्थान से जयकार यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। तपस्वी के साथ चल रहे समाजजनों ने मार्गभर भगवान महावीर, गुरुदेव और तपस्वी के जयकारे लगाए। इससे पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पौषध भवन पहुंची, जहां इसका रूपांतरण धर्मसभा में हो गया।
संयमी आत्माओं ने की तपस्वी के तप की अनुमोदना
धर्मसभा में संत एवं साध्वी मंडल ने 30 उपवास की कठिन तप आराधना पूर्ण करने पर तपस्वी रवि गादिया की अनुमोदना की। संतों ने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा की महत्वपूर्ण साधना है। तप के माध्यम से साधक अपनी आत्मा को संयम, त्याग और साधना की दिशा में आगे बढ़ाता है। उन्होंने तपस्वी को इस उत्कृष्ट आराधना के लिए खूब-खूब धन्यवाद एवं साधुवाद दिया।
संतों ने तपस्वी के परिवारजनों की भी सराहना की और कहा कि इतनी लंबी एवं कठिन तपस्या में तपस्वी के साथ परिवार का सहयोग और सकारात्मक वातावरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार ने धैर्य, सेवा और समर्पण के साथ तपस्वी का सहयोग किया, जिसके लिए उन्हें भी साधुवाद दिया गया।
तत्वज्ञश्री के सानिध्य में तप आराधना का बढ़ रहा क्रम
वर्तमान में तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म. सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी, जयंतमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी, गौरवमुनिजी ठाणा 8 तथा साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी एवं दीप्तिजी ठाणा 4 का सानिध्य श्रीसंघ को प्राप्त हो रहा है। संतों की प्रेरणा से वर्षावास के दौरान थांदला में तपस्या और धर्म आराधना का वातावरण बना हुआ है।
श्रीसंघ का प्रत्येक सदस्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार तप आराधना में सहभागी बनकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह और जिज्ञासा के साथ धर्मसभा में पहुंचकर संतों के प्रवचन सुन रहे हैं तथा विभिन्न तप आराधनाओं में सहभागी हो रहे हैं। कई तपस्वी मासक्षमण की ओर भी अग्रसर हैं।
तप की बोली तप से लगाकर किया बहुमान
तपस्वी रवि गादिया के बहुमान समारोह में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से विशेष रूप से तप की बोली तप से लगाई गई। इसके पश्चात तपस्वी का अभिनंदन करते हुए अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। विभिन्न परिवारों एवं संस्थाओं की ओर से भी तपस्वी का बहुमान किया गया।
इस दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से तपस्वी रवि गादिया के जयकारे लगाए। तपस्वी के भाइयों ने गादिया परिवार की ओर से सामूहिक स्तवन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने भी सभा में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने तपस्वी की आराधना की अनुमोदना करते हुए कहा कि ऐसी तप साधनाएं समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। कार्यक्रम का संचालन श्रीसंघ सचिव हितेश शाह ने किया।
वर्षावास के दौरान थांदला में धर्म, तप और संयम की आराधना का क्रम निरंतर बढ़ रहा है। संतों के सानिध्य और प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाओं में तप के प्रति उत्साह दिखाई दे रहा है। 30 उपवास मासक्षमण पूर्ण करने वाले तपस्वी रवि गादिया का यह तप समाज में त्याग, संयम और आत्मसाधना की प्रेरणा का संदेश दे गया।
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