मोहब्बत, अमन और भाईचारे का संदेश

 

थांदला में गूंजा ‘सरकार की आमद मरहबा’ का पैगाम, धूमधाम से निकला ईद मिलादुन्नबी का जुलूस
परंपरागत मार्गों से निकला भव्य जुलूस, जगह-जगह हुआ इस्तकबाल; विधायक वीरसिंह भूरिया सहित सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत, अमन-चैन और भाईचारे की मांगी दुआ

थांदला (सम्यक दृष्टि न्यूज़) पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी में बुधवार को थांदला में ईद मिलादुन्नबी का पर्व धार्मिक आस्था, उल्लास, सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज की ओर से शहर में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में समाजजन, युवा और बच्चे शामिल हुए। नात-ए-पाक की सदाओं और ‘सरकार की आमद मरहबा’ के नारों से नगर का वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया। जुलूस के दौरान जगह-जगह विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा बच्चों को चॉकलेट और समाजजनों को ठंडे पेयजल सहित जलपान वितरित किया।

पीरसाब गली से शुरू हुआ जुलूस, परंपरागत मार्गों से पहुंचा जामा मस्जिद

ईद मिलादुन्नबी का मुख्य जुलूस पीरसाब गली से प्रारंभ हुआ। जुलूस जामा मस्जिद, गांधी चौक, भंसाली चौराहा, पीपली चौराहा, आजाद चौक, गवली मोहल्ला और बोरा मोहल्ला सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकला और वापस जामा मस्जिद पहुंचा।

जुलूस में शामिल समाजजन अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहे। रास्तेभर नात-ए-पाक और पैगंबर साहब की शान में धार्मिक नारों की गूंज सुनाई देती रही। जुलूस में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा भी शामिल रहे। पर्व को लेकर मुस्लिम समाज में विशेष उत्साह नजर आया।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

जुलूस के मार्ग में नगरवासियों और सामाजिक संगठनों की ओर से स्वागत की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। कई स्थानों पर जुलूस में शामिल लोगों पर फूल बरसाकर इस्तकबाल किया गया। बच्चों को चॉकलेट तथा समाजजनों को ठंडे पेयजल और जलपान का वितरण किया गया।

पीपली चौराहे पर समाजसेवी राजू धानक एवं उनकी टीम ने मुस्लिम समाज के लोगों का पुष्पों से स्वागत किया। वहीं उम्मीद फाउंडेशन की ओर से जुलूस में शामिल लोगों के लिए ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई। अन्य स्थानों पर भी नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत कर सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

विधायक वीरसिंह भूरिया ने किया मुस्लिम समाज का इस्तकबाल

जुलूस के दौरान कांग्रेस विधायक वीरसिंह सिंह भूरिया ने मुस्लिम समाज के लोगों का स्वागत किया। विधायक द्वारा किए गए इस्तकबाल पर समाजजनों ने उनका आभार व्यक्त किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों की मौजूदगी ने नगर में आपसी भाईचारे की भावना को और मजबूत किया।

ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर विभिन्न समुदायों के लोगों द्वारा मुस्लिम समाज को शुभकामनाएं देने और जुलूस का स्वागत करने से थांदला की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सद्भाव की तस्वीर सामने आई।

पुलिस-प्रशासन ने संभाली व्यवस्था

जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जुलूस के निर्धारित मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के साथ ही जुलूस के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक अमला भी सक्रिय रहा।

व्यवस्थाओं में एसडीएम भास्कर गाचले, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कस्बा पटवारी सहित नगर परिषद के कर्मचारियों का सहयोग रहा। पुलिस प्रशासन की टीम भी पूरे जुलूस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही।

मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों और समाजजनों ने शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित आयोजन में सहयोग के लिए पुलिस प्रशासन, एसडीएम भास्कर गाचले, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कस्बा पटवारी तथा नगर परिषद के समस्त कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

जामा मस्जिद में धार्मिक कार्यक्रम, बाल मुबारक की हुई जियारत

जुलूस के जामा मस्जिद पहुंचने के बाद धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। खुशी के इस मौके पर मुस्लिम समाज की ओर से मिठाई वितरित की गई। इसके बाद हजरत मोहम्मद साहब से मनसूब बाल मुबारक की जियारत करवाई गई।

मौलाना इस्माइल कादरी ने फातेहा पढ़ी। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, खुशहाली और मुल्क की तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी गई। उपस्थित समाजजनों ने भी दुआ में शामिल होकर देश और समाज में शांति एवं सद्भाव की कामना की।

सीरत-ए-मुस्तफा में इंसानियत, रहम और इंसाफ का संदेश

ईद मिलादुन्नबी का पर्व हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी के साथ उनकी सीरत और शिक्षाओं को याद करने का अवसर भी माना जाता है। इस्लामी परंपरा में हजरत मोहम्मद साहब का जीवन सच्चाई, ईमानदारी, दया, इंसाफ, सब्र और इंसानियत की मिसाल माना गया है। लोगों ने उनके जीवन से जुड़े आदर्शों को याद करते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया।

इस्लामी परंपरा के अनुसार हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का मुकर्रमा में हुआ। बचपन से ही उनकी पहचान सच्चाई और ईमानदारी के लिए बनी और लोग उन्हें ‘अल-अमीन’ यानी भरोसेमंद के नाम से पुकारते थे। लगभग 40 वर्ष की आयु में हिरा की गुफा में उन्हें पहली वह्यी प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने लोगों को एकेश्वरवाद, सच्चाई, नेक आचरण और इंसानियत का संदेश दिया।

करीब 23 वर्षों तक उन्होंने लोगों को अल्लाह की इबादत के साथ गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, पड़ोसियों के अधिकारों का सम्मान, महिलाओं के सम्मान, अनाथों की देखभाल और इंसाफ की शिक्षा दी। मक्का से मदीना की हिजरत के बाद उन्होंने ऐसे समाज की स्थापना की दिशा में कार्य किया, जिसमें विभिन्न समुदायों के अधिकार और आपसी जिम्मेदारियां निर्धारित हों।

मोहब्बत, अमन और भाईचारे का संदेश

ईद मिलादुन्नबी का संदेश केवल उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पैगंबर साहब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। सच्चाई, इंसाफ, जरूरतमंदों की मदद, पड़ोसियों के अधिकारों का सम्मान, दया, क्षमा और समाज में प्रेम बनाए रखना उनकी शिक्षाओं के प्रमुख संदेशों में शामिल है।

थांदला में निकले ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में भी इन्हीं भावनाओं की झलक दिखाई दी। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा जुलूस का स्वागत, जनप्रतिनिधियों का इस्तकबाल तथा प्रशासन और पुलिस की व्यवस्थाओं में सहयोग ने नगर की सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत संदेश दिया।

धार्मिक उत्साह के बीच शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुए आयोजन ने यह संदेश दिया कि विविधताओं के बावजूद आपसी सम्मान, सद्भाव और भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla 


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