थांदला में दो ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

गुरुभक्ति से गूंजा थांदला: तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. सहित 8 ठाणा व आचार्य श्री कुशाग्रनन्दीजी का चातुर्मास हेतु ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

गुरुभक्ति में उमड़ा जनसैलाब, आस्था के जयघोषों से गूंजा नगर
थांदला (सम्यक दृष्टि न्यूज़)

धर्मनगरी थांदला उस समय भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठी, जब थांदला के नंदनों सहित धर्मदास सम्प्रदाय के पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., पूज्य श्री संदीपमुनिजी म.सा., पूज्य श्री जयन्तमुनिजी म.सा., पूज्य श्री प्रशस्तमुनिजी म.सा., पूज्य श्री सुयशमुनिजी म.सा., पूज्य श्री प्रसन्नमुनिजी म.सा., पूज्य श्री श्रेयांशमुनिजी म.सा. एवं पूज्य श्री गौरवमुनिजी म.सा.  ठाणा- आठ का आगामी चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और "हम भक्तों के भगवान पधारे", "थांदला के नंदन कोटि-कोटि वंदन" तथा "संयम इनका सख्त है, तभी तो लाखों भक्त हैं" जैसे गगनभेदी जयघोषों से पूरा नगर गुंजायमान हो उठा।

थांदला संघ की वर्षों पुरानी भावना हुई आंशिक रूप से पूर्ण

जैनाचार्य पूज्य श्री जवाहरलालजी म.सा. एवं जिनशासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. की जन्मस्थली थांदला से लगभग 50 संत दीक्षित होकर देशभर में जिनशासन की प्रभावना कर रहे हैं। थांदला श्रीसंघ की लंबे समय से इच्छा थी कि धर्मदास सम्प्रदाय के सभी थांदला मूल के संत एक साथ अपनी जन्मभूमि में चातुर्मास करें। हालांकि संतों की अल्पता एवं अन्य क्षेत्रों की मांग के कारण प्रवर्तक देव श्री जिनेन्द्रमुनिजी महाराज ने आठ संतों का चातुर्मास थांदला प्रदान कर श्रीसंघ की भावना को साकार किया। विशेष बात यह है कि इन आठ संतों में तीन सगे भाई, एक पिता-पुत्र तथा एक थांदला का नातिन भी शामिल हैं।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, बच्चों ने किया संगीतमय स्वागत

नगर प्रवेश के दौरान श्री महावीर जैन पाठशाला के बच्चों ने "स्वागतम् आपका गुरुवर" की मधुर प्रस्तुति देकर संतों का अभिनंदन किया। झाबुआ, मेघनगर, पेटलावद, कल्याणपुरा, रतलाम, इंदौर, दाहोद, बांसवाड़ा, कुशलगढ़ सहित अनेक स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। नगर में विराजित महासती पूज्य श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा ने भी गुरुदेव की अगवानी की। श्रीसंघ द्वारा बाहर से आए अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के लिए नवकारसी एवं विश्राम की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई।

चातुर्मास का लाभ धर्म साधना से उठाने का आह्वान

स्थानीय पौषध भवन में आयोजित धर्मसभा में पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. ने कहा कि संतों के लिए बारहों माह चातुर्मास समान होते हैं, क्योंकि उनका जीवन सदैव स्वाध्याय, तप और संयम में व्यतीत होता है। चातुर्मास का वास्तविक लाभ श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, तप, त्याग और साधना के माध्यम से उठाना चाहिए। उन्होंने नंदचक्र तप की आराधना करने की प्रेरणा देते हुए युवाओं से धर्ममय जीवन अपनाने का आह्वान किया।

रोचक शैली में दिया धर्म का संदेश

रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीपमुनिजी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर ने साधुओं को सदैव विहाररत रहने की प्रेरणा दी है, क्योंकि एक स्थान पर अधिक समय रहने से राग, द्वेष और परिग्रह की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि आज लोग संतों को तो चातुर्मास में एक स्थान पर रोक देते हैं, लेकिन स्वयं घूमने-फिरने और विदेश यात्राओं में व्यस्त हो जाते हैं। यदि संतों का चातुर्मास कराया जाए तो उसका पूरा आध्यात्मिक लाभ भी लेना चाहिए।

सभा में महासती पूज्य श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने भी अपनी भावना पूर्ण होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। अणु आराधना मंडल ने मंगलगीत प्रस्तुत किए, जबकि संघाध्यक्ष प्रदीप गादिया ने सभी से चातुर्मास को जप, तप, त्याग एवं स्वाध्याय के साथ मनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन संघ सचिव हितेश शाह ने किया। जानकारी संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने दी।

आचार्य श्री कुशाग्र नन्दीजी का चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश, बैंड-बाजों की भक्तिमय धुनों पर गूंजा थांदला

नगर में आज दिगम्बर जैन समाज के लिए भी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। आगामी चातुर्मास के लिए आचार्य 108 श्री कुशाग्रनन्दीजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। बैंड-बाजों की भक्तिमय धुनों, ढोल-नगाड़ों की गूंज, "जयकारा गुरुदेव का... जय-जय गुरुदेव" के गगनभेदी उद्घघोष, गुलाब के पुष्पों की वर्षा तथा श्रद्धालुओं के नृत्य-गान के बीच नगरवासियों ने आचार्य श्री का सकल संघ ने भव्य स्वागत किया। कुशलगढ़ रोड से प्रारंभ हुई शोभायात्रा बैंड-बाजों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होकर धर्मसभा स्थल पहुँची, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन एवं वंदना का लाभ लिया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री कुशाग्रनन्दीजी महाराज ने कहा कि "अनायास ही बहती गंगा थांदला आ गई है, अब सभी को इसमें धर्म की डुबकी लगानी है। "उन्होंने कहा कि समाज के आग्रह पर वे चातुर्मास के लिए थांदला पधारे हैं। अब समाज का भी कर्तव्य है कि वह धर्म, संयम, साधना और संस्कारों के मार्ग पर चलकर चातुर्मास को सार्थक बनाए।

आचार्य श्री ने भावपूर्ण शब्दों में कहा, "पहले हम आपके कहने पर थांदला आ गए हैं, अब आपको हमारा कहना मानना होगा। यदि आप धर्म की आराधना करेंगे तो जीवन के अनेक दुःख स्वतः समाप्त हो जाएंगे।" उन्होंने कहा कि चातुर्मास की शुरुआत में समाज की पहचान होती है, लेकिन चातुर्मास की समाप्ति और संत विहार के बाद संत की पहचान होती है। इसलिए जिस एकता, आत्मीयता और समर्पण के साथ समाज ने सकल संघ का स्वागत किया है, उसी भावना से पूरे चातुर्मास में धर्म प्रभावना, स्वाध्याय, तप एवं सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना होगा।

इस अवसर पर आचार्य 108 श्री कुंथुसागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य महामना तपोनिधि आचार्य 108 श्री कुशाग्रनन्दीजी महाराज, 108 श्री अजयऋषिजी महाराज, 105 गणिनी आर्यिका जिनवाणी माताजी, 105 गणिनी आर्यिका कीर्तिवाणी माताजी, 105 छुल्लिका विनम्रज्योति माताजी, 105 छुल्लिका अचलज्योति माताजी, 105 छुल्लिका पुण्यभारती माताजी, 105 स्वस्ति डॉ. पद्मकीर्ति स्वामीजी, ब्रह्मचारिणी आराधना दीदी एवं अमृतप्रिया दीदी सहित सकल संघ का बैंड-बाजों के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शोभायात्रा में श्रावक-श्राविकाएं, युवा वर्ग एवं बालक-बालिकाएं एक समान वेशभूषा में शामिल होकर अनुशासन और संगठन का उत्कृष्ट परिचय दे रहे थे।

धर्मसभा में दिगम्बर जैन समाज के संघ अध्यक्ष अरुण कोठारी ने समाज की ओर से आचार्य श्री एवं समस्त संत-सतियों का अभिनंदन करते हुए थांदला से दीक्षित हुए संतों एवं आर्यिकाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संतों की तपोभूमि होने के कारण थांदला को "संत नगरी" कहा जाना वास्तव में गौरव का विषय है।

कार्यक्रम का संचालन संघ पदाधिकारी संजय कोठारी एवं महिला मंडल अध्यक्षा अरुणा मेहता ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी कांतिलाल मेहता, राजेन्द्र पिंडारमा, इन्द्रवर्धन मेहता, अनूप मिंडा, विजय भीमावत, पारस मेहता, देवेंद्र मेहता, दीपक पिंडारमा, शशिकांत बोबड़ा, प्रकाश मेहता, विनय मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं, युवा एवं बालक-बालिकाएं उपस्थित रहे। सभी ने तपोनिधि संतों को "नमोस्तु" अर्पित कर सेवा-सुश्रुषा का सौभाग्य प्राप्त किया। बैंड-बाजों, भक्तिमय वातावरण और गुरु जयकारों के बीच हुआ यह भव्य मंगल प्रवेश नगरवासियों के लिए लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

विशेष बात यह रही कि दिगंबर जैन समाज में पूरे 17 वर्ष पश्चात किसी आचार्य का चातुर्मास होने जा रहा है, जिससे समाज में अपार हर्ष और उत्साह का वातावरण है। श्रद्धालुओं ने इसे नगर के लिए ऐतिहासिक एवं सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया। समाजजनों का मानना है कि आचार्यश्री के चातुर्मास से नगर में धर्म, साधना, स्वाध्याय एवं संस्कारों की नई चेतना का संचार होगा। 

Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic,


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