धर्म नगरी थांदला में गूंजे जिनशासन के जयकारे, चंद्रेशमुनिजी, पावनमुनिजी एवं जिनांशमुनिजी का भव्य मंगल प्रवेश
पक्खी पर्व पर धर्मसभा में अनुत्तर धर्म की महिमा का हुआ बखान, गुजरात के लिमखेड़ा में होगा संतों का प्रथम स्वतंत्र वर्षावास
अनुत्तर धर्म ही सच्चा मंगल – चंद्रेशमुनिजी म.सा.
मंगल प्रवेश एवं पक्खी पर्व के पावन अवसर पर स्थानीय पौषध भवन में धर्मसभा का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी म.सा. ने 'अनुत्तर धम्मो मंगलम्' की व्याख्या करते हुए कहा कि सामान्य व्यक्ति सुख-दुःख के आधार पर मंगल और अमंगल का निर्णय करता है, जबकि जिस सुख के गर्भ में भविष्य का दुःख छिपा हो, वह वास्तव में अमंगल ही है। विभिन्न दृष्टांतों एवं स्तवनों के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि पाप रहित धर्म का मार्ग ही वास्तविक सुख और मंगल का मार्ग है।
उन्होंने कहा कि जब जीव अनुत्तर श्रद्धा के साथ स्वयं पर अनुकम्पा करता है, तब वह पाप से विमुख होकर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है। इसके विपरीत असंयमी जीव की प्रत्येक प्रवृत्ति विषय-विकार, कषाय और विकथाओं को बढ़ाने वाली होती है, जो अंततः उसे दुःख की ओर ले जाती है। पूज्यश्री ने कहा कि धन की अंधी भूख ही अधिकांश पापों की जड़ है। जब मनुष्य में पापभीरुता और धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा जागृत होती है, तभी उसके भीतर धर्म की भूख उत्पन्न होती है और वही उसे वास्तविक सुख प्रदान करती है।
संयम में ही वास्तविक सुख – जिनांशमुनिजी म.सा.
धर्मसभा के प्रारंभ में थांदला गौरव पूज्य श्री जिनांशमुनिजी म.सा. ने कहा कि पंचम आरे के इस काल में सांसारिक सुख की कल्पना करना भी भ्रम है। उन्होंने उपस्थित युवा एवं प्रौढ़ श्रावक-श्राविकाओं से प्रश्न करते हुए कहा कि यदि संसार में कोई ऐसा प्रसंग हो जिसे पूर्ण सुख कहा जा सके तो उसे बताइए, लेकिन ऐसा कोई उदाहरण मिलना कठिन है। इसके विपरीत संयम के जीवन में उन्हें अनेक सुखद अनुभव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने वर्तमान समय में बिखरते पारिवारिक रिश्तों और समाप्त होती मानवीय संवेदनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल धर्म और संयम ही जीवन को स्थायी शांति प्रदान कर सकते हैं।
लिमखेड़ा में होगा प्रथम स्वतंत्र वर्षावास
धर्मसभा में जानकारी दी गई कि धर्मदासगण नायक पूज्य प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. की आज्ञा का शिरोधार्य करते हुए पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी म.सा. सहित समस्त मुनिवृंद का आगामी वर्षावास गुजरात के लिमखेड़ा में होगा। यह पूज्य गुरुदेव का प्रथम स्वतंत्र वर्षावास होगा और विशेष बात यह है कि लिमखेड़ा उनका गृह नगर भी है।
तपस्वियों ने लिए विभिन्न तपों के प्रत्याख्यान
पक्खी पर्व के पावन अवसर पर पक्खी मंडल के आराधकों, सामूहिक वर्षीतप के तपस्वियों एवं अन्य आराधकों ने पूज्य गुरुदेव से उपवास, आयम्बिल, निवि, एकासन सहित विभिन्न तपों के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। इस दौरान तप एवं संयम की आराधना का संकल्प लेकर श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत
थांदला विराजित महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. की सुशिष्याएं पूज्या श्री प्रियशीलाजी म.सा., पूज्या श्री दीप्तिश्रीजी म.सा. एवं श्रीसंघ प्रदीप गादिया सहित थांदला के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पेटलावद मार्ग तक मुनिवृंद की अगवानी के लिए पहुंचे। महापुरुषों एवं गुरुभगवंतों के जयकारों के बीच संतों का नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। सभा का संचालन संघ सचिव हितेश शाह ने किया। उन्होंने पूज्य गुरुदेव के पूर्व वर्षावास की स्मृतियों का उल्लेख करते हुए उनके धर्मोपकारों को याद किया तथा कुछ दिन थांदला में स्थिरता प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और धर्ममय उल्लास का अनुपम वातावरण देखने को मिला।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla


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