परमात्मा के प्रति श्रद्धा जुड़ने पर साधना में बल और ऊर्जा पैदा हो जाती है : श्रमण संघीय प्रवर्तक परम् पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी म.सा.
मोहन टॉकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का गुणानुवाद श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से किया जाता है। तपस्वी भी परमात्मा से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को धन्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंगल में सिंह और परमात्मा दोनों पराक्रम के प्रतीक माने जा सकते हैं। सिंह जंगल में अकेला रहता है और स्वयं शिकार करके अपने जीवन का निर्वाह करता है। उसी प्रकार परमात्मा भी जंगल में रहकर अकेले साधना करते हैं और निर्भय जीवन व्यतीत करते हैं।
उन्होंने कहा कि भय व्यक्ति की साधना शक्ति को कमजोर कर देता है। इसके विपरीत श्रद्धा और भक्ति साधक के भीतर आत्मबल का निर्माण करती है। परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा होने पर उनका नाम स्मरण मात्र भी साधक के भीतर नई शक्ति और ऊर्जा का संचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
स्वावलंबी बनकर साधना करें
प्रवर्तकश्री ने कहा कि साधना के क्षेत्र में साधक को स्वावलंबी होना चाहिए। यदि साधक परावलंबी हो जाएगा तो उसके भीतर कषाय बढ़ सकते हैं। साधना का उद्देश्य ही कषायों को छोड़ना है। क्रोध, लोभ, मोह, माया आदि विकारों से मुक्त हुए बिना साधना का वास्तविक फल प्राप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि ‘मेरे गुरु’, ‘मेरा साधक’ जैसे भावों में भी मोह का जन्म हो सकता है। साधक को ऐसे मोह से बचना चाहिए। आत्मा यदि बाहरी मोह-ममता और आकर्षणों में भटकती रहेगी तो साधना का उद्देश्य सार्थक नहीं हो पाएगा। साधना का मार्ग आत्मा को भीतर की ओर ले जाने वाला मार्ग है। इसलिए प्रत्येक साधक को निरंतर आत्मनिरीक्षण करते हुए अपने भीतर के विकारों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए।
मासक्षमण तप पूर्ण होने पर सिल्वी छाजेड़ का बहुमान
मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के सुशिष्य एवं श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ‘निर्भय’ की निश्रा में रतलाम में तपस्या का दौर जारी है। शुक्रवार को सिल्वी राकेश छाजेड़ ने मासक्षमण की दीर्घ तपस्या पूर्ण की। तपस्या पूर्ण होने पर श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति की ओर से तपस्वी का बहुमान किया गया। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या की अनुमोदना करते हुए तपस्वी के प्रति मंगलभाव व्यक्त किए।
धर्मसभा के प्रारंभ में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने संबोधित किया। श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने मासक्षमण तपस्या की महत्ता पर प्रकाश डाला। धर्मसभा का संचालन रखब चत्तर ने किया।
इस अवसर पर सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी म.सा., प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी म.सा. एवं महासती श्री कल्पनाजी म.सा. मंचासीन रहे।
धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।




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