भगवान महावीर ने वसीयत नहीं, नसीहत दी है।

उत्तराध्ययन आगम यात्रा में गूंजा ‘जल है तो कल है’ का संदेश

भगवान महावीर ने वसीयत नहीं, नसीहत दी है : महाप्रज्ञाजी

साध्वी महाप्रज्ञाजी ने किया उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन, धर्म और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

इंदौर, 26 अक्टूबर (सम्यक दृष्टि, जनेश्वर जैन) एयरपोर्ट रोड स्थित नरसिंह वाटिका में चातुर्मासार्थ विराजित परम पूज्य महासती श्री कुमुदलताजी म.सा. के पावन सान्निध्य में सोमवार को उत्तराध्ययन श्रुतदेव की आराधना का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर आनंद तीर्थ परिवार, इंदौर की ओर से भव्य उत्तराध्ययन आगम यात्रा निकाली गई। यात्रा में धर्म, ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। महिलाओं ने ‘जल है तो कल है’ और ‘जल ही जीवन है’ के नारों के माध्यम से जल संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया।

भगवान महावीर ने वसीयत नहीं, नसीहत दी है : महाप्रज्ञाजी
धर्मसभा में महासती श्री महाप्रज्ञाजी म.सा. ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने वसीयत नहीं, नसीहत दी है। पिता की अंतिम शिक्षा को जो नहीं मानता, वह गद्दार कहलाता है। इसी प्रकार भगवान की वाणी को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्षों से उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन और श्रवण किया जा रहा है, लेकिन प्रत्येक श्रावक को आत्ममंथन करना चाहिए कि उसने इससे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में कितना परिवर्तन किया है। धर्म का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक क्रियाएं करना नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और आचरण में सुधार लाना है।

साध्वीश्री ने कहा कि उत्तराध्ययन ऐसा महत्वपूर्ण आगम है, जो जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर शंकाओं का समाधान करता है। यह भगवान महावीर का अंतिम उपदेश है, जो उन्होंने पावापुरी में राजा हस्तिपाल की हस्तिशाला में दिया था। यह आगम हम सभी के लिए आध्यात्मिक प्रसाद के समान है, जिसका अध्ययन आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करता है।

नवपद ओली के समापन पर श्रीपाल-मैना सुंदरी चरित्र का वाचन

कार्यक्रम के अंतर्गत नवपद ओली आराधना के अंतिम दिन साध्वी श्री पद्मकीर्तिजी म.सा. ने श्रीपाल-मैना सुंदरी चरित्र का भावपूर्ण वाचन किया। इस दौरान आराधना के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। ओली आराधना करने वाले तपस्वियों का श्रीसंघ की ओर से सम्मान किया गया।

आगम यात्रा में महिलाओं ने दिया जल संरक्षण का संदेश

उत्तराध्ययन आगम यात्रा श्री हंसकुमार-नीरा मकवाना के महेश नगर स्थित निवास से प्रारंभ हुई। यात्रा निहार नेत्रालय और बड़ा गणपति होते हुए नरसिंह वाटिका पहुंची। यात्रा में इंदौर के विभिन्न महिला मंडलों की आकर्षक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

महिलाओं ने आकर्षक वेशभूषा में ‘जल है तो कल है’ और ‘जल ही जीवन है’ के नारों के साथ समाज को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने संदेश दिया कि कंक्रीट की सड़कें और पक्के निर्माण वर्षा जल को जमीन में समाने से रोकते हैं, जिससे जलभराव की समस्या बढ़ती है और भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

यात्रा के माध्यम से वर्षा जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया गया। आयोजन ने धार्मिक आराधना के साथ सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की प्रेरणा भी दी।

मकवाना परिवार का बहुमान, 27 अक्टूबर से नियमित वाचना

आगम यात्रा के लाभार्थी श्री हंसकुमार-नीरा मकवाना परिवार का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया। कार्यक्रम में आनंद तीर्थ परिवार, आनंद तीर्थ महिला परिषद एवं गौतम लब्धि फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा। धर्मसभा का संचालन श्री जिनेश्वर जैन ने किया।

आयोजकों के अनुसार, 27 अक्टूबर से प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे नरसिंह वाटिका में उत्तराध्ययन सूत्र की नियमित वाचना होगी। श्रवकों से इसमें सहभागी बनकर आगम ज्ञान का लाभ लेने का आह्वान किया गया।

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