प्रवर्तक रमेशमुनिजी की पुण्यतिथि पर गुणानुवाद, गौतम लब्धि कलश समर्पण से सेवा का संदेश
प्रवर्तक रमेशमुनिजी के गुणों का किया स्मरण
धर्मसभा में महासती श्री कुमुदलताजी महाराज साहब ने प्रवर्तक श्री रमेशमुनिजी महाराज साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे महान संत थे। उनके चेहरे पर कभी क्रोध दिखाई नहीं देता था। संपन्न परिवार में जन्म लेने के बाद विवाहोपरांत उन्होंने संयम का मार्ग अपनाकर दीक्षा ग्रहण की और अपना संपूर्ण जीवन धर्म एवं समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
महासतीजी ने बताया कि प्रवर्तक श्री रमेशमुनिजी ने लगभग 70 पुस्तकों की रचना की तथा 56 आत्माओं को दीक्षा प्रदान कर संयम मार्ग पर अग्रसर किया। वर्तमान में उनके 18 शिष्य धर्मसंघ की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या, ज्ञान और साधना की प्रेरणा देने वाला रहा।
इस अवसर पर चातुर्मास समिति के महामंत्री श्री रमेशजी भंडारी ने भी प्रवर्तक श्री रमेशमुनिजी महाराज साहब के गुणों का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रवर्तकश्री के निकट रहने और उनके सान्निध्य से प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर मिला।
नवपद आराधना के आठवें दिन चरित्र की महत्ता बताई
चातुर्मास के अंतर्गत चल रही नवपद आराधना के आठवें दिवस पर साध्वी श्री पद्मकीर्तिजी महाराज साहब ने चरित्र के महत्व पर विशेष उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चरित्र का होना अत्यंत आवश्यक है। जिसके पास चरित्र की चादर नहीं, उसका जीवन शून्य है। व्यक्ति को वंदन उसके पद या प्रतिष्ठा के कारण नहीं, बल्कि उसके त्याग, तप और चरित्र के कारण किया जाता है। चरित्र ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान है और यही जीवन को सार्थक बनाता है।
विधायक अरुणजी भीमावत सहित गणमान्यजन रहे उपस्थित
साध्वी राजकीर्तिजी के सान्निध्य में 500 बच्चों ने ग्रहण किए धर्म संस्कार
दोपहर में साध्वी श्री राजकीर्तिजी महाराज साहब के सान्निध्य में कुमुद संस्कार पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें लगभग 500 बच्चों ने भाग लेकर धर्म एवं संस्कारों की शिक्षा ग्रहण की। बच्चों में धार्मिक मूल्यों, सदाचार, अनुशासन और नैतिकता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित यह पाठशाला चातुर्मास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
संपूर्ण चातुर्मास में कुमुद संस्कार पाठशाला के लाभार्थी श्रीमती महेंद्रजी-गणगौर (महेंद्र नमकीन परिवार) परिवार रहे।
कल से उत्तराध्ययन श्रुतदेव की आराधना का शुभारंभ
धर्मसभा में जानकारी दी गई कि सोमवार से उत्तराध्ययन श्रुतदेव की आराधना का शुभारंभ होगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को महासती श्री महाप्रज्ञाजी महाराज साहब के मुखारविंद से उत्तराध्ययन श्रुतदेव का श्रवण करने का लाभ मिलेगा। आगम आराधना के इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
रविवार की धर्मसभा में गुरु गुणानुवाद, चरित्र की महत्ता, साधर्मिक सेवा और बच्चों में धर्म संस्कारों के प्रसार का संदेश प्रमुख रहा।
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla






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