महामांगलिक का श्रवण करने देश के विभिन्न शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रतलाम पहुंचे।

नौ दिवसीय मौन साधना के बाद उपप्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने दी महामांगलिक, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
जय-जयकार के साथ निकला चल समारोह, प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ने बताया महासतीवृंद का इतिहास

महासती श्री चांदकुंवरजी म.सा. की 103वीं दीक्षा जयंती उत्साह के साथ मनाई

रतलाम, 25 अक्टूबर (सम्यक दृष्टि, प्रकाश मूणत) मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न एवं श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. के पावन सान्निध्य में रतलाम में आयोजित चातुर्मास ‘भाग्य से सौभाग्य की ओर’ के अंतर्गत रविवार को धर्म आराधना का विशेष प्रसंग देखने को मिला। प्रवचन प्रभाविका उपप्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने नौ दिवसीय मौन साधना पूर्ण कर महामांगलिक प्रदान की। इस पावन अवसर पर महामांगलिक का श्रवण करने देश के विभिन्न शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रतलाम पहुंचे। पूरा परिसर धर्ममय वातावरण और जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

जयकारों के साथ निकला भव्य चल समारोह

नौ दिवसीय मौन साधना की पूर्णता के उपलक्ष्य में चौमुखीपुल स्थित डीपीके परिसर से भव्य चल समारोह निकाला गया। इसमें उपप्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. सहित अन्य महासतियां एवं समाजजन शामिल हुए। श्रद्धालु जय-जयकार करते हुए चल समारोह में आगे बढ़े। समारोह मोहन टॉकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार पहुंचा, जहां प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की धर्मसभा आयोजित हुई।

इस अवसर पर खरगोन, करई, पुणे, धूलिया, नासिक, बसंत पीपलगांव, मुंबई के घाटकोपर, लिमड़ी, मेघनगर, बदनावर, खाचरौद, कुशलगढ़, थांदला, उज्जैन, इंदौर सहित अनेक स्थानों से गुरुभक्त रतलाम पहुंचे। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।

साध्वियां अपने ज्ञान से करती हैं जिन शासन की प्रभावना : प्रवर्तकश्री
धर्मसभा में श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ने धर्म प्रभावना में महासतीवृंद के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ में चार प्रवर्तिनी पदों की स्थापना की गई थी और चारों प्रवर्तिनियों का परिवार आज भी धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साध्वियों ने सदैव संघ की गरिमा बढ़ाई है और अपने ज्ञान, तप तथा साधना के बल पर जिन शासन की विशेष प्रभावना की है।

प्रवर्तकश्री ने कहा कि महासतियों का गुरु के प्रति समर्पण प्रेरणादायी है। जीवन में सेवा का विशेष महत्व है। जो व्यक्ति दूसरों की सेवा करते हैं, उन्हें आशीर्वाद प्राप्त होते हैं और उन आशीर्वादों का सकारात्मक प्रभाव उनके जीवन में दिखाई देता है। सेवा और समर्पण से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

धर्मसभा को महासती श्री चंदनबाला जी म.सा. एवं श्री स्वर्णाश्रीजी ने भी संबोधित किया। नवदीक्षित महासती श्री तेजस्विनीजी म.सा. ने भावपूर्ण स्तवन प्रस्तुत किया। वहीं, नौ दिवसीय मौन साधना पूर्ण करने वाली प्रवचन प्रभाविका उपप्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने कहा कि आत्मकल्याण के लिए साधना श्रेष्ठ माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति को आत्मकल्याण के उद्देश्य से साधना का अनुसरण करना चाहिए। साधना से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और जीवन को सही दिशा मिलती है।

चातुर्मास की उपलब्धियों पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने बाहर से पधारे अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने रतलाम चातुर्मास के दौरान हुई धार्मिक गतिविधियों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस दौरान लिमड़ी के हंसमुख भाई गोलेचा एवं मेघनगर के विनोद बाफना ने अपने भाव व्यक्त करते हुए प्रवर्तकश्री से डूंगर पधारने की विनती की। प्रत्युत्तर में प्रवर्तकश्री ने कहा कि चातुर्मास के दौरान उनके समक्ष की गई सभी विनतियां उनकी झोली में हैं।

धर्मसभा में सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी म.सा., प्रवचन प्रभाविका उपप्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबाला जी म.सा. एवं महासती श्री कल्पनाजी म.सा. मंचासीन रहे।

इस अवसर पर श्री धर्मदास जैन श्री संघ, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आयुष गंग एवं रखब चत्तर ने किया। अंत में डीपीके परिवार एवं चातुर्मास समिति की ओर से प्रभावना का वितरण किया गया।

महासती श्री चांदकुंवरजी म.सा. की 103वीं दीक्षा जयंती मनाई

रविवार को श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी म.सा. की निश्रा में महाराष्ट्र सौरभ महासती श्री चांदकुंवरजी म.सा. की 103वीं दीक्षा जयंती भी उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर चातुर्मास समिति की ओर से सामूहिक एकासना का भव्य आयोजन किया गया। इसमें बाहर से पधारे अतिथियों का आतिथ्य-सत्कार भी किया गया।

नौ दिवसीय मौन साधना की पूर्णता, महामांगलिक श्रवण और दीक्षा जयंती के आयोजनों ने रतलाम के धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

संकलनकर्ता:- अरुण त्रिपाठी 

Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla 



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