अलंकरण समारोह में श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ने कहा—तप और त्याग पर ही टिका है जिनशासन
उन्होंने कहा कि दृढ़ आत्मबल और मनोबल के बिना न तो संयम का मार्ग अपनाया जा सकता है और न ही कठिन तपस्या की जा सकती है। तपस्या अपने आप में एक औषधि है, जो आत्मिक आरोग्य प्रदान करती है। तप और त्याग से ही परमात्मा का शासन जयवंत बना हुआ है। महासती चंद्रयशाजी म.सा. और उनका परिवार धन्य है, जो निरंतर तप, त्याग और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि रतलाम धर्मनगरी और जयवंत नगरी है। यहां अनेक आत्माएं दान, तप, संयम और सेवा की यात्रा पर अग्रसर हैं। श्रीसंघ में तन, मन और धन से सेवा करने वाले श्रावक-श्राविकाओं की लंबी श्रृंखला है। उन्होंने कहा कि जहां सौभाग्य ही सौभाग्य होता है, वहां आनंद ही आनंद रहता है। रतलाम की धर्मप्रेमी जनता द्वारा की जा रही तपस्या और आराधना इसका प्रमाण है।
उन्होंने कर्म सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा कि संसार में मिलने वाले सुख अनंत पुण्य के परिणाम हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह पुण्य कर्मों के साथ-साथ कर्म निर्जरा की साधना भी करता रहे। तपस्या कर्म निर्जरा के लिए होती है। तप और त्याग के माध्यम से आत्मा अपने कर्मों का भार कम करती है। इसलिए जीवन में जितना संभव हो, उतना तप, त्याग, संयम और धर्म आराधना करते रहना चाहिए।
महोत्सव से पूर्व मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. की मासिक नवमी के जाप सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ पर सुबह किए गए। इसके बाद चातुर्मास स्थल पर भी जाप हुए। तपस्या अनुमोदना महोत्सव के प्रारंभ में महिला मंडल एवं बहु मंडल ने भावपूर्ण स्तवन प्रस्तुत किए।
श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने तपमेरू अलंकरण एवं कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। समारोह को राजमल चोपड़ा, अवनि बोहरा, शुभम चत्तर, राजेंद्र सकलेचा तथा खाचरौद श्रीसंघ के महेंद्र चंडालिया ने भी संबोधित किया। प्रवर्तकश्री के साथ मधुर गायिका श्री चंदनबालाजी म.सा., उप प्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी म.सा. एवं वर्धमान आयंबिल तप आराधिका श्री प्रफुल्लाजी म.सा. की भी पावन निश्रा रही।
समारोह में नासिक, पुणे, जलगांव, औरंगाबाद, लिमड़ी, राजगढ़, पेटलावद, थांदला, संभाजीनगर, कोपरगांव, कलवन, मेघनगर सहित विभिन्न स्थानों से गुरुभक्त एवं श्रीसंघ के प्रतिनिधि पहुंचे। खाचरौद श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष ऋतुराज बुडावनवाला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मासक्षमण तपस्या के प्रत्याख्यान लेने पर अदिति गंग एवं पूनमचंद बरबेटा का बहुमान किया गया। कार्यक्रम का संचालन आयुष गंग ने किया। श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पारसमल वोरा, उपाध्यक्ष इंदरमल चौपड़ा, मंत्री रखब चत्तर, कोषाध्यक्ष मुकेश चौरडिया, भंवरलाल पुंगलिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। पूरे आयोजन में तपस्विनी महासतीजी के प्रति श्रद्धा, अनुमोदना और धर्म आराधना का वातावरण बना रहा।





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