परिवार के प्रति मोह से उपजी करुणा सच्ची करुणा नहीं, जीव मात्र के प्रति करुणा रखना ही धर्म है – प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी म.सा.
रतलाम, 2 नवंबर (सम्यक दृष्टि, प्रकाश मूणत)
परमात्मा के शासन में करुणा का विशेष महत्व है, कठोरता का नहीं। सच्ची करुणा वही है, जिसमें व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ, अपेक्षा, पहचान अथवा संबंध के दूसरे जीव के प्रति संवेदना रखता है। जिससे हमारा कोई लेना-देना नहीं, कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं और न ही कोई परिचय है, उसके प्रति भी करुणा का भाव रखना ही सच्चे धर्मात्मा की पहचान है। परिवार के प्रति मोह के कारण उत्पन्न होने वाली करुणा वास्तविक करुणा नहीं, बल्कि मोह का ही एक रूप है। सच्ची करुणा का विस्तार समस्त जीव जगत तक होना चाहिए।
उक्त प्रेरक विचार मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न एवं श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी म.सा. ने सोमवार को मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश लोग मोह के भाव में जीवन जी रहे हैं। यही कारण है कि संसार से तारने वाली अच्छी धार्मिक क्रियाओं में भी मान, प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि की भावना का विष घुल जाता है। व्यक्ति धार्मिक कार्य तो करता है, तपस्या भी करता है, लेकिन उसके भीतर कहीं न कहीं सम्मान पाने की अपेक्षा छिपी रहती है। एक सच्चा साधक कभी सम्मान और प्रशंसा का भूखा नहीं होता। वह अपनी साधना को आत्मकल्याण का माध्यम मानता है, न कि अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने का साधन।
उन्होंने कहा कि आजकल तप आराधना का भी इतना प्रचार-प्रसार किया जाता है कि कई बार तपस्वी के मन में मान कषाय उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि तपस्या के साथ मान-सम्मान की अपेक्षा जुड़ गई तो साधना का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो जाता है। तपस्या का लाभ तभी है, जब उसके साथ विनम्रता, समर्पण और आत्मशुद्धि का भाव जुड़ा हो। धर्म का मार्ग प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का मार्ग है।
करुणा आत्मा का भाव, इसी से प्रकट होता है धर्म
प्रवर्तकश्री ने करुणा की महत्ता समझाते हुए कहा कि करुणा के भाव होना धर्मी जीव की पहचान है, क्योंकि करुणा आत्मा का स्वाभाविक भाव है। जब जीव के भीतर अनंत करुणा जागृत होती है, तभी वह केवलज्ञान की दिशा में अग्रसर होता है। करुणा का भाव समाप्त होने पर अधर्म प्रकट होता है और जहां करुणा विद्यमान रहती है, वहां धर्म की अभिव्यक्ति होती है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यवहार और विचारों में प्रत्येक जीव के प्रति संवेदनशीलता रखनी चाहिए। करुणा केवल अपने परिवार, रिश्तेदारों अथवा परिचितों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जो व्यक्ति अपने सुख-दुख से ऊपर उठकर दूसरे जीव के दुख को समझता है और उसके प्रति आत्मीयता रखता है, वही वास्तविक धर्म के मार्ग पर चलता है। जीव मात्र के प्रति करुणा रखने से मन निर्मल होता है और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
तपस्वियों ने लिए प्रत्याख्यान, जाप में शामिल हुए श्रावक-श्राविकाएं
धर्मसभा के प्रारंभ में सेवाभावी श्री दर्शन मुनिजी म.सा. ने समोवशरण एवं पुच्छिसुणम जाप करवाए। इसमें श्रावक श्वेत वस्त्रों तथा श्राविकाएं केसरिया वस्त्रों में शामिल हुईं। प्रवर्तकश्री ने विभिन्न तपस्याएं करने वाले तपस्वियों को अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान करवाए।
कार्यक्रम का संचालन आयुष गंग ने किया। इस अवसर पर प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी म.सा. एवं महासती श्री कल्पनाजी म.सा. मंचासीन रहे।
धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल तथा श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
3 नवंबर को मनेगा मालव केसरीजी का मासिक पुण्य स्मृति दिवस
सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ में होगा जाप एवं गुणानुवाद सभा का आयोजन
रतलाम। सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ में मंगलवार, 3 नवंबर को मालव केसरी, महाराष्ट्र विभूषण, श्रमण संघ प्रणेता, वाणी के जादूगर एवं जन-जन की आस्था के केंद्र प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव 1008 श्री सौभाग्यमलजी म.सा. का मासिक पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।
इस अवसर पर धर्मदास गणनायक प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री प्रकाश मुनिजी म.सा., पूज्य श्री दर्शन मुनिजी म.सा. ठाणा-2, विदुषी साध्वी रत्न पूज्य श्री चंदनबालाजी म.सा., सेवाभावी पूज्या महासती श्री कल्पनाजी म.सा. तथा महाराष्ट्र चंद्रिका, खानदेश रत्ना, उपप्रवर्तनी पूज्य श्री सुमनप्रभाजी म.सा. एवं पूज्य श्री स्वर्णश्रीजी म.सा. ठाणा-8 का पावन सानिध्य प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत सुबह जाप का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमलजी म.सा. के जीवन, व्यक्तित्व, धर्म प्रभावना एवं समाज के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए गुणानुवाद सभा आयोजित होगी।
इस दौरान चातुर्मास समिति 2026 ‘भाग्य से सौभाग्य की ओर’ की ओर से साधर्मिक भक्ति का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य स्मृति दिवस में सहभागी बनने का आह्वान किया गया है।
संकलनकर्ता:- अरुण त्रिपाठी
Dr.Talera's Multi-speciality Dental Clinic, Thandla




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